Crude Oil: भारत सरकार ने अपने तेल रिफाइनरों से रूस (Russia) और अमेरिका (America) से होने वाले कच्चे तेल के आयात का साप्ताहिक डेटा देने को कहा है. इस मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत और अमेरिका के बीच एक संभावित व्यापार समझौते (India US Trade Deal) को लेकर बातचीत चल रही है. सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे जा सकता है.
व्यापार घाटा कम करने की कोशिश कर रहा US यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस से सस्ते समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था. हालांकि, पश्चिमी देशों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाए, यह तर्क देते हुए कि तेल से होने वाली कमाई रूस के युद्ध प्रयासों को समर्थन देती है. अमेरिका पहले से ही भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने की कोशिश कर रहा था. इसी क्रम में उसने पिछले साल भारतीय सामानों पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया. यह कदम रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने के चलते उठाया गया था. फिलहाल दोनों देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत जारी है, हालांकि यह कई बार कठिन साबित हुई है. तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल यानी PPAC ने रिफाइनरों से रूस और अमेरिका से होने वाले तेल आयात की साप्ताहिक जानकारी मांगी है. सूत्रों के अनुसार यह जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के कार्यालय के लिए मांगी गई है. एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि उद्देश्य यह है कि अमेरिका से जब भी जानकारी मांगी जाए, तो भारत के पास सही और सत्यापित आंकड़े हों और सेकेंडरी सोर्स पर निर्भर न रहना पड़े.
रूसी तेल आयात घटने की उम्मीद सूत्रों ने बताया कि यह डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा. आमतौर पर तेल आयात से जुड़े आंकड़े मासिक कस्टम डेटा और निजी एनालिटिक्स फर्मों के जरिए सामने आते हैं. यह पहली बार है जब सरकार ने साप्ताहिक आधार पर यह जानकारी मांगी है. सूत्रों का कहना है कि रिफाइनरों को रूसी तेल खरीद कम करने का सीधा निर्देश नहीं दिया गया है, लेकिन आने वाले महीनों में आयात घटने की उम्मीद है.
भारत में रूसी तेल की सप्लाई धीमी
अमेरिका और यूरोपीय संघ के सख्त प्रतिबंधों के चलते भारत में रूसी तेल की आपूर्ति पहले ही धीमी हो चुकी है. दिसंबर में यह घटकर करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन पर आ गई, जो तीन साल का निचला स्तर है. यह जून में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन के शिखर से लगभग 40 फीसदी कम है. 2025 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 6.6 फीसदी रही, जबकि रूस की हिस्सेदारी 35 फीसदी थी.
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