रबी फसलों पर मौसम मेहरबान : गेहूं निर्यात से हट सकती है रोक, रिकॉर्ड उपज की उम्मीद, जानें दलहन-तिलहन का हाल...

रबी फसलों पर मौसम मेहरबान : गेहूं निर्यात से हट सकती है रोक, रिकॉर्ड उपज की उम्मीद, जानें दलहन-तिलहन का हाल...
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Category: Business
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समय से पहले आई सर्दी और मिट्टी में मौजूद पर्याप्त नमी ने इस बार रबी की फसलों के लिए संजीवनी का काम किया है। मौसम के इस अनुकूल मिजाज से गेहूं, चना और सरसों की बुवाई को जबरदस्त रफ्तार मिली है। खेतों में खड़ी फसल का विकास तेजी से हो रहा है, जो किसानों के लिए राहत भरी खबर है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, रबी फसलों की बुवाई अपने अंतिम चरण में है और अब तक कुल 61.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल के मुकाबले आंशिक रूप से अधिक है।देश के अधिकांश हिस्सों में गेहूं की बुवाई का काम पूरा हो चुका है, केवल बिहार के कुछ इलाकों में यह प्रक्रिया चल रही है। अब तक 32.2 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा ज्यादा है। ठंडे मौसम ने फसल की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2024-25 में 117.9 मिलियन टन के रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के बाद, आगामी फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) में भी बंपर पैदावार की प्रबल संभावना है। गोदामों में अनाज की अधिकता और बंपर उत्पादन के अनुमानों को देखते हुए, सरकार मई 2022 में लगाए गए गेहूं निर्यात प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर सकती है। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया ने बताया कि शुरुआती रिपोर्ट और मौसम की स्थिति एक और बंपर फसल की ओर इशारा कर रही है। वर्तमान में, भारतीय खाद्य निगम के पास 1 जनवरी के लिए निर्धारित 13.8 मिलियन टन के बफर स्टॉक के मुकाबले 28.06 मिलियन टन का सरप्लस गेहूं का भंडार मौजूद है।दलहन के क्षेत्र में भी अच्छी प्रगति देखी गई है। दालों का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले बढ़कर 13.34 मिलियन हेक्टेयर हो गया है। इसमें चने की बुवाई 9.58 मिलियन हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल से 5% ज्यादा है। मयूर ग्लोबल कॉरपोरेशन की हेड हर्षा राय के मुताबिक, अनुकूल मौसम ने बुवाई और शुरुआती फसल विकास में मदद की है, लेकिन पैदावार और फसल की गुणवत्ता के लिए जनवरी का मौसम निर्णायक साबित होगा। देश के कुल दलहन उत्पादन में चने की हिस्सेदारी 50% है।वहीं, तिलहन में प्रमुख फसल सरसों की बुवाई का दायरा 1.5% बढ़कर 8.78 मिलियन हेक्टेयर हो गया है। राजस्थान के भरतपुर स्थित एक किसान उत्पादक संगठन के सीईओ रूप सिंह कहते हैं कि फसल का हाल पिछले साल से बेहतर है और अभी तक किसी भी तरह के कीट लगने की सूचना नहीं है। अगर मौसम ऐसा ही बना रहा, तो पैदावार पिछले साल से अधिक होगी। कृषि मंत्रालय ने 2024-25 फसल वर्ष के लिए 12.64 मिलियन टन सरसों उत्पादन का अनुमान लगाया है। इससे भारत की खाद्य तेल आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, जो फिलहाल खपत का लगभग 57% है।फसलों के लिए एक और सुखद पहलू सिंचाई के पानी की उपलब्धता है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के अनुसार, देश के 166 प्रमुख बांध अपनी कुल क्षमता का 80.1% तक भरे हुए हैं। यह जल स्तर पिछले साल की तुलना में 6% अधिक है और पिछले दस सालों के औसत से 23% ज्यादा है।देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य या सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। लेकिन, उत्तर-पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से कम हो सकती है। गुजरात और राजस्थान में हाल ही में हुई बारिश ने खड़ी फसलों को काफी फायदा पहुंचाया है। रबी की फसलें मुख्य रूप से मिट्टी की नमी और बांधों या भूजल से होने वाली सिंचाई पर निर्भर करती हैं, और मौजूदा आंकड़े किसानों के लिए एक समृद्ध सीजन का संकेत दे रहे हैं।

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