सत्य निकेतन हादसे के बाद बदला DUSU चुनाव का रंग-रूप, क्या कह रहे हैं छात्र?

सत्य निकेतन हादसे के बाद बदला DUSU चुनाव का रंग-रूप, क्या कह रहे हैं छात्र?
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Category: Politics
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सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव का रंग-रूप पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है. चुनावी माहौल में जहां पहले रंगारंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की चर्चा थी, वहीं अब छात्र संगठनों के प्रदर्शन, आंदोलन और छात्रों की सुरक्षा के मुद्दे प्रमुखता से सामने आ रहे हैं. छात्रों में गुस्सा और चिंता हादसे के बाद NDTV ने विश्वविद्यालय से जुड़े ऐसे छात्रों से भी बातचीत की, जो किसी छात्र संगठन से नहीं जुड़े हैं. बातचीत में छात्रों के बीच हादसे को लेकर दुख और गुस्सा साफ नजर आया. कई छात्रों का कहना था कि हादसे के बाद भी अगर व्यवस्थाओं में बदलाव नहीं हुआ, तो छात्रों की जिंदगी में संघर्ष की स्थिति बनी रहेगी. DU में हॉस्टल की कमी बड़ी समस्या दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की कमी लंबे समय से छात्रों के सामने एक बड़ी चुनौती है. DU में ही पोस्ट ग्रेजुएशन छात्र संदीप ने NDTV से बातचीत में बताया कि विश्वविद्यालय के पास करीब 20 हॉस्टल हैं, जिनमें PG और PhD रिसर्च स्कॉलर्स रहते हैं. इसके अलावा DU के अलग-अलग कॉलेजों के अपने हॉस्टल भी हैं, लेकिन उनमें भी सभी छात्रों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों को PG या किराए के मकान में रहना पड़ता है. दूसरे राज्यों से आने वाली छात्राओं पर आर्थिक दबाव DU की लॉ छात्रा आयुष ने बताया कि खासकर छात्राओं के लिए सुरक्षित और किफायती PG मिलना चुनौती है. उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों से दिल्ली पढ़ने आने वाले छात्रों और उनके परिवारों पर महंगे PG और किराए का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है. ABVP-NSUI भी हॉस्टल की सीटें बढ़ाने के पक्ष में NDTV ने जब छात्र संगठनों ABVP और NSUI के छात्र नेताओं से बात की, तो दोनों संगठनों की ओर से हॉस्टल में सीटों की कमी का मुद्दा उठाया गया. छात्र नेताओं का कहना था कि विश्वविद्यालय में हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि छात्रों को रहने के लिए निजी PG और महंगे किराए पर निर्भर न रहना पड़े. चुनाव के बीच हादसे ने बढ़ाई राजनीतिक सक्रियता एक तरफ छात्रों में हादसे को लेकर नाराजगी है, तो दूसरी तरफ DUSU चुनाव के ठीक पहले हुए इस हादसे ने विश्वविद्यालय के राजनीतिक माहौल को भी बदल दिया है. छात्र संगठन अब चुनावी गतिविधियों के साथ-साथ सड़कों पर प्रदर्शन और आंदोलन करते नजर आ रहे हैं. ABVP का प्रदर्शन, रोजाना विरोध का दावा ABVP की ओर से North Campus में Arts Faculty के पास बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है. संगठन की ओर से हादसे के बाद लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं. ABVP व्यापक स्तर पर MCD कमिश्नर के इस्तीफे की मांग उठा रही है और हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रही है. NSUI ने दिल्ली सरकार और केंद्र को घेरा वहीं NSUI भी लगातार प्रदर्शन कर रही है. संगठन की ओर से दिल्ली और केंद्र सरकार को सीधे तौर पर निशाने पर लिया जा रहा है. NSUI का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और रहने की व्यवस्था को लेकर सरकारों को जवाबदेही तय करनी चाहिए. घटनास्थल पर पहुंचे दोनों छात्र संगठन हादसे के बाद ABVP और NSUI दोनों के कार्यकर्ता घटनास्थल पर पहुंचे थे. दोनों संगठनों की ओर से अपने-अपने स्तर पर लोगों की मदद किए जाने की बात सामने आई. हालांकि, इसके साथ ही सोशल मीडिया पर राहत कार्यों के दौरान कथित तौर पर रील बनाने और फोटोशूट को लेकर भी छात्र संगठनों की आलोचना हुई. राजनीति के बीच हादसे में जान गंवाने वाले छात्र सबसे अहम कुल मिलाकर DUSU चुनाव के बीच हुआ यह हादसा छात्र राजनीति के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है. चुनावी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और वार-पलटवार के बीच छात्रों की सुरक्षा, हॉस्टल की कमी और किफायती आवास जैसे मुद्दे केंद्र में आ गए हैं. लेकिन इस पूरी राजनीतिक बहस के बीच उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए जिन्होंने इस हादसे में अपनी जान गंवाई. वे किसी राजनीतिक संगठन के कार्यकर्ता नहीं, विद्यार्थी थे. उनकी मौत सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा और उनके रहने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल है.

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