Bilaspur बिलासपुर । सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को अपलोड, प्रसारित, ट्रांसमिट, संशोधित, स्टोर या होस्ट करने से पहले संबंधित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह आदेश हर्षिता ग्रोवर की रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत कहा कि कोर्ट की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल केवल सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा।
। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियोको बिना अनुमति सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को अपलोड, प्रसारित, ट्रांसमिट, संशोधित, स्टोर या होस्ट करने से पहले संबंधित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह आदेश हर्षिता ग्रोवर की रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत कहा कि कोर्ट की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल केवल सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल या संबंधित हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की पूर्व अनुमति के बाद ही किया जा सकेगा।
सुनवाई के दौरान याचिका में कई हाईकोर्ट को पक्षकार बनाए जाने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक उल्लेख के बाद आंध्र प्रदेश, इलाहाबाद, बॉम्बे, कलकत्ता, गुजरात, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य हाईकोर्ट को मामले में प्रतिवादी बनाया। इसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को भी प्रतिवादी क्रमांक 12 के रूप में शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वे लाइव स्ट्रीमिंग और कोर्ट कार्यवाही की रिकॉर्डिंग से जुड़े मॉडल नियमों को अपनाने की स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने रिपोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवहारिकता और लगातार संचालन से जुड़े प्रभावों की जानकारी देने को भी कहा है।
सोशल मीडिया पर रिकॉर्डिंग शेयर करने पर रोक
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्यायिक कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या किसी अन्य डिजिटल माध्यम पर पोस्ट, री-पोस्ट, मॉनेटाइज या सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया जा सकेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस अंतरिम आदेश का मान्यता प्राप्त समाचार संस्थानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अधिकृत मीडिया संस्थान पहले की तरह न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग कर सकेंगे। कोर्ट का यह कदम न्यायिक कार्यवाही की गरिमा बनाए रखने और रिकॉर्डिंग के गलत इस्तेमाल को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
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