दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुरक्षित रखा था फैसला
जोधपुर पीठ ने सोमवार को इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुना था। विस्तृत सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला मंगलवार के लिए सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को अदालत ने निर्णय सुनाते हुए सिंबल विवाद से संबंधित सभी 17 याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके साथ ही इन प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा कानूनी विवाद भी समाप्त हो गया।
पार्टी के निर्देश पर नामांकन का दावा, फिर नहीं मिला चुनाव चिह्न
फैसले के बाद प्रत्याशियों का कहना है कि उन्होंने पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों के निर्देश पर ही अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। उनका दावा था कि पार्टी की ओर से उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अधिकृत किया गया था, लेकिन चुनाव प्रक्रिया के अंतिम समय में उनके चुनाव चिह्न स्वीकार नहीं किए गए। इसी को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।
17 प्रत्याशियों ने उठाया था समय सीमा का सवाल
प्रत्याशियों ने अपनी याचिकाओं में मुख्य रूप से यह सवाल उठाया था कि जब पार्टी ने तय समय सीमा के भीतर अधिकृत चुनाव चिह्न उपलब्ध करा दिए थे, तो फिर केवल 17 प्रत्याशियों के मामलों में अलग निर्णय क्यों लिया गया। इसी विवाद और सिंबल की अस्वीकृति के बाद प्रत्याशियों ने न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
यह भी पढ़ें: अमायरा मौत केस में फिर गरमाया माहौल, CJP ने ढीली धाराओं और जमानत पर उठाए सवाल, सख्त कार्रवाई की मांग
हाईकोर्ट से याचिकाएं खारिज, चुनाव का रास्ता बंद
अब हाईकोर्ट की ओर से सभी 17 याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद इन प्रत्याशियों के लिए नगर निगम चुनाव लड़ने के सभी विकल्प बंद हो चुके हैं। फैसले का सीधा असर कांग्रेस के चुनावी मैदान पर पड़ा है और अब भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में पार्टी के 53 अधिकृत प्रत्याशी ही मैदान में रह गए हैं।
(0)Comments