साइबर ठगी से बचने का संदेश दे रहा रायगढ़, अनजान कॉल पर नहीं घबराए रिटायर्ड शिक्षक

साइबर ठगी से बचने का संदेश दे रहा रायगढ़, अनजान कॉल पर नहीं घबराए रिटायर्ड शिक्षक
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Category: Politics
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Raigarh. रायगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे 'साइबर जागृति अभियान' का असर रायगढ़ जिले में दिखाई देने लगा है। अभियान के तहत पुलिस लगातार लोगों को साइबर अपराध के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दे रही है। जागरूकता का नतीजा यह है कि अब लोग साइबर ठगी के प्रयासों को छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे 'साइबर जागृति अभियान' का असर रायगढ़ जिले में दिखाई देने लगा है। अभियान के तहत पुलिस लगातार लोगों को साइबर अपराध के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दे रही है। जागरूकता का नतीजा यह है कि अब लोग साइबर ठगी के प्रयासों को पहचानकर खुद सतर्क हो रहे हैं और संदिग्ध घटनाओं की जानकारी तत्काल पुलिस तक पहुंचा रहे हैं। इसी क्रम में 8 सितंबर को रायगढ़ पुलिस कार्यालय पहुंचे सेवानिवृत्त शिक्षक और सेंट्रल गवर्नमेंट के सेवानिवृत्त अधिकारी तिलक कुमार कटकवार ने साइबर ठगी के एक प्रयास की जानकारी पुलिस को दी। उन्होंने बताया कि शाम के समय उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई स्थित सेंट्रल कमिश्नर कार्यालय का अधिकारी बताया और डराने की कोशिश की। सिम कार्ड से आतंकवाद का कनेक्शन बताकर डराया कटकवार के अनुसार कॉल करने वाले ने दावा किया कि दो आतंकवादी पकड़े गए हैं और उनके पास से उनके नाम का एक सिम कार्ड बरामद हुआ है। इसके बाद कॉलर ने उनके खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने की बात कही। इस तरह की बातें करके उन्हें डराने और दबाव में लेने का प्रयास किया गया। ऐसे मामलों में साइबर ठग आमतौर पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को भयभीत करते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी, पूछताछ, मनी लॉन्ड्रिंग या किसी गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देकर उनसे पैसे या निजी जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, कटकवार कॉलर के झांसे में नहीं आए। उन्होंने उसकी बातों पर भरोसा करने के बजाय स्पष्ट रूप से कहा कि वह किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएंगे। इसके बाद उन्होंने फोन पर बातचीत के आधार पर किसी प्रकार की निजी या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं की और स्वयं पुलिस कार्यालय पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी। लोगों से निजी जानकारी साझा नहीं करने की अपील कटकवार ने आम नागरिकों से भी अपील की कि अनजान नंबरों से आने वाले इस तरह के फोन से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, एटीएम कार्ड की जानकारी, ओटीपी, यूपीआई संबंधी विवरण, आधार या अन्य निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने लोगों को आगाह किया कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी गतिविधि या किसी अन्य आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देता है, तो यह साइबर ठगी का तरीका हो सकता है। ऐसी स्थिति में कॉल को तुरंत काटकर संबंधित पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देनी चाहिए। खरसिया और तमनार में भी जागरूकता अभियान रायगढ़ जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में पुलिस द्वारा साइबर जागरूकता अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। घरघोड़ा, खरसिया और तमनार पुलिस ने भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। थानों में आने वाले लोगों को साइबर अपराध से बचाव के उपाय बताए गए। पुलिस ने लोगों को जागरूक करने के साथ उन्हें 'साइबर अवेयरनेस सेल्फी' लेने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए भी प्रेरित किया। इसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा से जुड़ा संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। क्रिकेट मैदान तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश पूंजीपथरा पुलिस ने छर्राटांगर, सराईपाली और पूंजीपथरा क्षेत्र में पोस्टर और बैनर के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। पुलिस टीम क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान मैदान में मौजूद युवाओं के बीच भी पहुंची और उन्हें ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग तरीकों की जानकारी दी। पुलिसकर्मियों ने युवाओं को विशेष रूप से ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी नौकरी, लोन ऐप, सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट, फर्जी निवेश, यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट और केवाईसी अपडेट के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान रहने की सलाह दी। अनजान लिंक और स्क्रीन शेयरिंग से बचें पुलिस ने लोगों से कहा कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड नहीं करना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी निजी जानकारी सार्वजनिक करने से बचना जरूरी है। साइबर ठग इन जानकारियों का इस्तेमाल लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए कर सकते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि 'डिजिटल गिरफ्तारी' नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर पूछताछ, गिरफ्तारी या खाते में पैसे जमा करने का दबाव बनाए तो नागरिकों को तत्काल कॉल काट देना चाहिए और पुलिस को इसकी जानकारी देनी चाहिए। इस जागरूकता अभियान के दौरान थाना पूंजीपथरा के प्रशिक्षु उप निरीक्षक मनीष पोया, आरक्षक ओमप्रकाश तिवारी, विनोद शर्मा और नरेंद्र पैंकरा सहित पुलिस टीम मौजूद रही। पुलिस का उद्देश्य जागरूकता के माध्यम से लोगों को साइबर अपराध का शिकार बनने से बचाना और संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल सूचना देने के लिए प्रेरित करना है।

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