पाकिस्तान एक बार फिर गम्भीर मोड़ पर

पाकिस्तान एक बार फिर गम्भीर मोड़ पर
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Category: Politics
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पाकिस्तान शुरू से ही भारत के लिए बड़ी सिरदर्दी बना रहा है। इस पड़ोसी देश की दुश्मनी भरी चुनौती के साथ निपटने के लिए भारत ने अब तक खरबों रुपये खर्च कर दिए हैं परन्तु इसके बावजूद हालत में सुधार नहीं आया। पाकिस्तान अपने अस्तित्व से लेकर अब तक स्थिर नहीं रहा, बल्कि बहुत बार यहां के लोगों को लम्बे तानाशाही प्रशासनों की सख्ती को भुगतना पड़ा है। इसमें लगातार गड़बड़ी वाले हालात बने रहे हैं, अपनी गलत और बेतरतीबी वाली नीति के कारण इस देश में दुनिया भर के आतंकवादी इकट्ठे होते रहे हैं जो न सिर्फ भारत और अन्य देशों के लिए लगातार खतरा बने रहे हैं। बल्कि अब पाकिस्तान के लिए भी बड़ा खतरा बन कर उभरे हैं। इनकी गतिविधियों ने पाकिस्तान को भी लहू-लुहान किया हुआ है। पहले अपने सिखाए और अब उसके दुश्मन बने पाकिस्तानी तालिबान पाकिस्तान के प्रशासन को पलट कर अफगानिस्तान की तरह यहां अपना इस्लामिक शरीयत वाला शासन कायम करना चाहते हैं। इसलिए वहां लगातार हालात गड़बड़ वाले बने रहते हैं। खैबर पख्तूनख्वा में अपने कायम किए अड्डों के अलावा सीमापार अफगानिस्तान से भी वह अपनी हमलावर कार्रवाईयां जारी रख रहे हैं। यह भी एक बड़ा कारण है कि कल का उसका मित्र अफगानिस्तान भी आज उसका इसलिए दुश्मन बन गया है क्योंकि पाकिस्तान ने पाकिस्तानी तालिबानों के सीमापार कैंपों पर हवाई हमले जारी रखे हुए हैं। अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों पर बमबारी करके पाकिस्तान द्वारा वहां के आम लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है। अफगानिस्तान इसको अपनी प्रभुसत्ता पर हमला समझता है, जिस कारण दोनों ही देश लगातार हथियारबंद टकराव के कारण जंग की स्थिति में आए रहते हैं। ब्रिटिश शासन के समय से ही भारत और अफगानिस्तान के बीच जो डूरंड रेखा खींची गई थी, को लेकर दोनों देशों में झगड़ा चलता आ रहा है। भारत के बटवारे के बाद यह इलाके पाकिस्तान के पास चले जाने के कारण सीमावर्ती झगड़े की लड़ाई अब उसको झेलनी पड़ गई है। इसको हल किया जाना मुश्किल लगता है। पाकिस्तान के प्रांत बलोचिस्तान में भी बलोच मुज़ाहिदों ने पाकिस्तान के विरुद्ध एक बड़ी जंग छेड़ रखी है। इस लड़ाई में जहां सेना द्वारा लगातार बलोच विद्रोहियों को मारा जा रहा है वहीं बलोचों की अपनी बनाई सेना पाकिस्तान के साथ पूरी टक्कर ले रही है और इसके लिए लगातार खतरा बन रही है। इसी तरह पाक अधिकृत कश्मीर में एक तरह से ब़गावत फैली हुई है और वहां बड़ी संख्या में लोग किसी भी स्थिति में पाकिस्तान में नहीं रहना चाहते। इसके एक और बड़े प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में भी बगावती स्वर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसका कारण अफगानिस्तान की सीमा से इसका जुड़ा होना है। पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर तथा पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पृष्ठभूमि भी इस प्रांत से जुड़ी हुई है। जिस तरह का व्यवहार शहबाज़ सरकार एवं सेना उनके साथ कर रही है, उसने पठानों में गुस्से को और भी बढ़ा दिया है। प्रत्येक प्रांत में हालात बिगड़े हुए होने के कारण प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की सरकार बेहद कमज़ोर हो चुकी है। इसी दौरान पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अलग-अलग समय पर ज़्यादातर सुरक्षा एवं प्रशासन संबंधी शक्तियां अपने हाथ में ले ली हैं। अब सेना द्वारा देश के चारों प्रांतों को विभिन्न भागों में बांटने की योजना बनाई गई है। इसलिए सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने यह फरमान जारी कर दिया है कि इन चारों प्रांतों को 12 प्रशासनिक क्षेत्रों में बांटा जाएगा। अब इसे लेकर सिंध में एक बड़ा बवाल मच गया है। सिंध में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सरकार है। पहले से ही इस पार्टी का प्रांत में बड़ा आधार बना रहा है। कुछ दिन पहले ही वहां के पीपल्स पार्टी के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह के नेतृत्व में सिंध प्रांत की विधानसभा ने प्रांत का विभाजन कर नई प्रशासकीय इकाइयां बनाने के खिलाफ भारी बहुमत से प्रस्ताव पारित कर दिया है। मुख्यमंत्री ने सदन में यह भी कहा कि उनकी सरकार सिंध की भौगोलिक अखंडता से कोई समझौता नहीं करेगी और वह किसी भी कीमत पर सेना के ज़रिए सिंध प्रांत को बांटने नहीं देंगे और इसका प्रत्येक पक्ष से भारी विरोध किया जाएगा। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ सरकार के समय पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के आसिफ अली ज़रदारी को राष्ट्रपति बनाया गया था। ज़रदारी भी सेना के इस विभाजन की योजना के खिलाफ हैं। उन्होंने लंदन में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन तथा अपने बेटे बिलावल भुट्टो के साथ बातचीत की है। सेना की इस योजना के विरुद्ध पीपल्स पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने जनरल आसिम मुनीर की सिंध को तीन भागों में बांटने की योजना पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने राष्ट्रपति को एक सप्ताह में इस योजना पर सहमति प्रकट करने का निर्देश दिया है। प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ, जिनका संबंध पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से है, ने भी पंजाब को कई भागों में बांटने पर असहमति व्यक्त की है। इससे पाकिस्तान में एक बार फिर ऐसा विवाद पैदा होने की सम्भावना है, जो सेना के लिए चुनौती बन सकता है। पहले ही देश भर में असंतोष फैला हुआ है। अब यह नया विवाद पाकिस्तान के हालात को और अधिक विस्फोटक बना सकता है। —बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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