दिव्यांग कार्यालय में कुलदीप को लेकर पहुंची दिल्ली पुलिस, खंगाले रिकार्डदिव्यांग कार्यालय में कुलदीप को लेकर पहुंची दिल्ली पुलिस, खंगाले रिकार्डदिव्
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र प्रकरण में सोमवार को एक बार फिर दिल्ली पुलिस सीएमओ कार्यालय पहुंची। कार्यालय में डाटा इंट्री का काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारी कुलदीप को पुलिस साथ लेकर आई थी। कार्यालय में करीब दो घंटे तक दिव्यांग प्रमाण पत्र पटल सहायक और नोडल अधिकारी से पूछताछ की गई। बीते कई साल के रिकॉर्ड खंगाले गए। उसके बाद बाबू को दिल्ली पुलिस ने जाने दिया लेकिन कुलदीप के साथ ही कार्यालय से कंप्यूटर, हार्डडिस्क, प्रिंटर भी साथ ले गई। सीएमओ कार्यालय में पूरे दिन दिल्ली पुलिस आने की वजह से हलचल रही। सुबह ही दिल्ली पुलिस कुलदीप को लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंची। पहले उसका जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मेडिकल कराया गया। फिर टीम उसे लेकर दिव्यांग प्रमाण पत्र कार्यालय पहुंची और दरवाजा बंद कर लिया। कुछ देर बाद पटल सहायक को भी टीम ने अंदर बुला लिया। इस दौरान कोतवाली का एक सिपाही गेट पर तैनात रहा और किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं दी। करीब दो घंटे तक कंप्यूटर में रिकॉर्ड खंगाले गए। उसके बाद कुलदीप को लेकर टीम वापस चली गई.
दिव्यांग प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने की तैयारी
दिल्ली पुलिस के हाथ लगे फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के बाद अब विभाग अलर्ट हो गया है। बीते 5-6 साल में बने दिव्यांग प्रमाण पत्रों के रैंडम वेरिफिकेशन की तैयारी की जा रही है। साथ ही इसकी भी जांच की जाएगी कि प्रमाण पत्र जारी होने के बाद कितने लोगों ने पहचान पत्र पर अपने पते संशोधित कराए हैं।
नोडल का बस नाम, आउटसोर्सिंग कर्मचारी पासवर्ड लेकर कर रहे काम
- सपोर्ट स्टाफ के नाम पर तैनात अधिकांश कर्मचारी दूसरे काम कर रहे
- गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद विभाग की कई बार हो चुकी है फजीहत
बरेली, वरिष्ठ संवाददाता। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का मामला सामने आने के बाद अब अधिकारी अपने को बचाने में जुट गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वह सिर्फ मोबाइल नंबर पर ओटीपी देते हैं। लेकिन लागिन आईडी और पासवर्ड आउटसोर्सिंग कर्मचारी को किसके निर्देश पर दिया गया था, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। सीएमओ कार्यालय में ऐसे कई संविदाकर्मी और आउटसोर्सिंग कर्मचारी हैं जिनकी तैनाती कहीं और है और काम दूसरा कर रहे हैं। इससे कई बार विभाग की फजीहत हो चुकी है.
शहरी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में सपोर्ट स्टाफ के नाम पर भर्ती हुआ कर्मचारी
नोडल से भी अधिक प्रभाव रखता है। वह सपोर्ट स्टाफ का काम नहीं करता बल्कि एनयूएचएम में सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है। वहीं सीएमएसडी स्टोर में तैनात संविदाकर्मी जेम पोर्टल पर आर्डर देने का काम कर रहा है। उसके पास लागिन आईडी और पासवर्ड कई साल से है। गलत तरीके से आर्डर का मामला सामने आने के बाद उसे हटाया गया था लेकिन फिर उसे दोबारा काम दे दिया गया। इसी तरह ब्लाक लेखा प्रबंधक के पद पर तैनात कर्मचारी सीएचसी की बजाय दूसरी जगह काम कर रहे हैं। उनको भी लागिन आईडी और पासवर्ड दे दिया गया है.
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