पर्वाधिराज पर्युषण: शास्त्रों में श्रावकों के चार और साधुओं के लिए पांच कर्तव्य निहित

पर्वाधिराज पर्युषण: शास्त्रों में श्रावकों के चार और साधुओं के लिए पांच कर्तव्य निहित
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श्रमण संघीय प्रवर्तक प्रकाश मुनि ने सौभाग्य प्रकाश दरबार में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर्युषण के दिनों में शास्त्र का श्रवण करना चाहिए। शास्त्र अनुसार जो भी नियम बताए गए है, उनका पालन करना चाहिए। रतलाम. पर्वाधिराज पर्युषण आत्मा को निर्मल बनाने आए है। पर्युषण के आठों दिन आत्मा के साथ जियो। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मान और माया सभी कषायों से दूर रहकर आत्म साधना करो। आठ दिन अपने मन को मोडना है। यदि इन दिनों में आत्मा की शुद्धि के लिए साधना कर लीे, तो सुखी हो जाओगे। यह विचार प्रवर्तक प्रकाश मुनि निर्भय ने पर्वाधिराज पर्युषण के पहले दिन धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मोहन टाकीज स्थित सौभाग्य प्रकाश दरबार में धर्मसभा को उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका सुमनप्रभा एवं महासती चंदनबाला ने भी संबोधित किया। इस दौरान प्रदेश एवं देश विभिन्न स्थानों से गुरुभक्तों ने रतलाम पहुंचकर धर्मलाभ लिया। सेवाभावी दर्शनमुनि, महासती कल्पना मंचासीन रहे। धर्मसभा का संचालन प्रकाश मूणत ने किया। पर्युषण के दिनों में क्या करें प्रवर्तक मुनि ने कहा कि पर्युषण के दिनों में शास्त्र का श्रवण करना चाहिए। शास्त्र अनुसार जो भी नियम बताए गए है, उनका पालन करना चाहिए। शास्त्रों में श्रावकों के लिए चार और साधुओं के लिए पांच कर्तव्य निहित है, जिनका पालन करते हुए साधना करना चाहिए। पर्युषण का अंतिम दिन क्षमा का है। यदि किसी से कोई भूल हो जाए अथवा वर्ष भर में किसी का दिल दुखाया हो, तो इस दिन क्षमा याचना कर लेना चाहिए। इससे मन हल्का हो जाता है और मन हल्का रखने वाला सदैव सुखी रहता है। तपस्याएं जारी, 41 सूत्रीय संकल्प पत्र प्रवर्तक मुनि की निश्रा में मंगलवार को महासती चंद्रयशा ने 35 उपवास के प्रत्याख्यान में 34 उपवास की तपस्या पूर्ण की। प्रखर गंग ने 24 उपवास और क्रिजंल मेहता के 23 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। अन्य तपस्वियों ने अलग-अलग तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। धर्मसभा में 41 सूत्रीय संकल्प पत्र का वितरण किया गया। इसमें श्रावक-श्राविकाओं से रात्रि भोजन त्याग सहित विभिन्न प्रकार के त्याग का संकल्प का आव्हान किया गया है। सामूहिक अष्टठाई का संकल्प किया श्वेताम्बर जैन समाज का पर्वाधिराज पर्युषण पर्व मंगलवार से शुरू हो गया। 20 सितंबर तक मंदिरों पर अनेक धार्मिक आयोजन होंगे। पाŸवनाथ मित्र मंडल ट्रस्ट टीआईटी रोड श्रीसंघ जैन धर्मशाला पर प्रथम दिन अष्टान्हिका प्रवचन सुबह 9 बजे से हुए। इस दौरान सामूहिक अष्टठाई का संकल्प किया। 11 सितंबर कल्पसूत्र वाचन सुबह 8.30 बजे से शुरू होगा। 12 सितंबर को जन्मवांचन प्रवचन सुबह 8.30 बजे से होंगे। इस दौरान सपनाजी एवं अष्टमंगल के चढ़ावे सुबह 10.30 बजे से होंगे। 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा। सुबह 8.30 बजे प्रवचन के बाद चैत्य परिपाटी एवं वार्षिक प्रतिक्रमण शाम को होगा। 16 सितंबर को सामूहिक क्षमापना पर्व सुबह 8.30 बजे से मनाया जाएगा। रथयात्रा 20 सितंबर सुबह 8.30 बजे निकाली जाएगी। पर्युषण पर्व प्रथम दिन प्रभु नमीनाथ के दर्शन-वंदन कस्तूरबा नगर जिनालय में पर्युषण पर्व की शुरुआत हर्षोल्लास के साथ हुई। सुबह से ही प्रभु नमीनाथ के दर्शन, वंदन और पूजन के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रही। सुबह 9 से 11 बजे तक उपाश्रय में साध्वी के प्रवचन हुए। समाजसेवी अमित कोठारी ने बताया कि दोपहर में स्नात्र पूजा रखी गई। शाम 6.45 बजे प्रतिक्रमण हुआ और रात 9 बजे बिबड़ौद नवयुवक मंडल परिवार की ओर से आरती का आयोजन किया। इसके बाद बहु मंडल ने भाव यात्रा रखी। इस अवसर पर न्यास मंडल अध्यक्ष बाबूलाल सियार, राजेंद्र कोठारी, अशोक कोठारी, देवेंद्र पुगलिया, कनकमल जैन, प्रमोद रांका, लोकेश ओस्तवाल आदि बड़ी संख्या में धर्मालु मौजूद रहे। भाव यात्रा के लाभार्थी संजय मांडलेचा परिवार रहा।

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