8GB vs 12GB RAM Explained: क्या ज्यादा RAM से फोन तेज होता है? जानिए असली फर्क

8GB vs 12GB RAM Explained: क्या ज्यादा RAM से फोन तेज होता है? जानिए असली फर्क
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Category: SciTech
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8GB vs 12GB RAM Explained: नया फोन खरीदते समय एक सवाल लगभग हर खरीदार के मन में होता है, फोन में कितनी रैम (RAM) होनी चाहिए? आज बाजार में 6GB, 8GB, 12GB, 16GB और यहां तक कि 24GB रैम वाले फोन भी मिल रहे हैं। कंपनियां भी ज्यादा रैम को फोन की बड़ी खासियत की तरह पेश करती हैं। विज्ञापन देखकर लगता है कि अगर 8GB की जगह 12GB रैम वाला फोन ले लिया जाए तो फोन अपने आप ज्यादा तेज, ज्यादा ताकतवर और कई साल तक बेहतर चलेगा। लेकिन असली कहानी थोड़ी अलग है। 12GB रैम वाला फोन हर काम में 8GB रैम वाले फोन से तेज नहीं होता। कई मामलों में दोनों फोन लगभग एक जैसी गति से काम कर सकते हैं। रैम का मुख्य काम फोन को तेज करना नहीं, बल्कि एक साथ ज्यादा काम संभालने की जगह देना है। यानी ज्यादा रैम का सबसे बड़ा फायदा तब दिखाई देता है जब आप एक साथ बहुत सारे काम करते हैं। एक ऐप से दूसरे ऐप में बार-बार जाते हैं, कई बड़े खेल खुले रहते हैं, तस्वीर और वीडियो पर काम करते हैं या ऐसे ऐप इस्तेमाल करते हैं जिन्हें ज्यादा स्मृति की जरूरत होती है। तो आखिर रैम करती क्या है? 8GB और 12GB के बीच कितना फर्क पड़ता है? और क्या अब नया फोन लेते समय 12GB रैम के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना समझदारी है? सबसे पहले समझिए, रैम होती क्या है? रैम (RAM) यानी रैंडम एक्सेस मेमोरी (Random Access Memory) फोन की अस्थायी वर्किंग मेमोरी है। आसान भाषा में कहें तो यह वह जगह है जहां फोन उस समय चल रहे ऐप और जरूरी डेटा थोड़ी देर के लिए रखता है। इसे एक मेज के उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आप किसी मेज पर बैठकर काम कर रहे हैं। मेज जितनी बड़ी होगी, उतनी ज्यादा किताबें, कागज और दूसरी चीजें आप एक साथ अपने सामने रख सकेंगे। अगर मेज छोटी है तो बार-बार कुछ सामान उठाकर अलमारी में रखना और फिर जरूरत पड़ने पर वापस निकालना पड़ेगा। फोन में रैम कुछ इसी तरह काम करती है। जब आप कोई ऐप खोलते हैं तो फोन उसके जरूरी हिस्सों को रैम में रखता है, ताकि जरूरत पड़ने पर वह जल्दी से काम कर सके। अगर आप एक ऐप से दूसरे ऐप में जाते हैं और वापस पहले ऐप पर आते हैं, तो ज्यादा रैम होने पर उस ऐप के दोबारा शुरू होने की जरूरत कम पड़ सकती है। यही वजह है कि ज्यादा रैम का सबसे बड़ा फायदा एक साथ कई काम करने की क्षमता में दिखाई देता है। क्या ज्यादा रैम का मतलब ज्यादा तेज फोन है? सीधे तौर पर नहीं। फोन की स्पीड कई चीजों पर निर्भर करती है। सबसे महत्वपूर्ण चीजों में प्रोसेसर (Processor), ग्राफिक्स प्रोसेसर (GPU), भंडारण की गति (Storage Speed), सॉफ्टवेयर का बेहतर ढंग से बनाया जाना, फोन का तापमान संभालने की क्षमता और रैम प्रबंधन शामिल हैं। इसे ऐसे समझिए। रैम आपके काम करने की मेज है और प्रोसेसर वह व्यक्ति है जो उस मेज पर बैठकर काम कर रहा है। अगर मेज बहुत छोटी है तो काम करने में परेशानी होगी। लेकिन मेज को बहुत बड़ा कर देने से व्यक्ति की काम करने की गति अपने आप नहीं बढ़ जाएगी। इसी तरह 8GB की जगह 12GB रैम होने से फोन का प्रोसेसर अचानक ज्यादा तेज नहीं हो जाता। अगर दो फोन में एक जैसा प्रोसेसर, एक जैसा स्टोरेज और लगभग एक जैसा सॉफ्टवेयर है, तो केवल रैम 8GB से बढ़ाकर 12GB कर देने से हर काम की गति में बड़ा अंतर दिखाई देना जरूरी नहीं है। फिर 12GB रैम का फायदा क्या है? इसका सबसे बड़ा फायदा तब दिखाई देता है जब फोन में एक साथ बहुत सारे काम चल रहे हों। मान लीजिए आपने इंटरनेट पर कुछ पढ़ा, फिर मैसेज भेजने वाले ऐप में गए, उसके बाद वीडियो देखा, फिर कैमरा खोला और वापस पहले ऐप में लौट आए। फोन को पहले वाले ऐप की स्थिति याद रखनी होगी। अगर रैम पर्याप्त है तो वह ऐप उसी जगह से दोबारा खुल सकता है जहां आपने उसे छोड़ा था। लेकिन रैम कम पड़ने लगे तो फोन पुराने ऐप को रैम से हटा सकता है। जब आप उस ऐप पर वापस आएंगे तो वह फिर से लोड हो सकता है। यही वह जगह है जहां 12GB रैम, 8GB रैम से बेहतर अनुभव दे सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को 12GB रैम की जरूरत है। 8GB रैम आज कितनी है? 2026 में 8GB रैम सामान्य उपयोग करने वाले ज्यादातर लोगों के लिए काफी है। अगर आपका इस्तेमाल मुख्य रूप से फोन कॉल, संदेश, इंटरनेट, सोशल मीडिया, वीडियो देखने, तस्वीरें लेने, बैंकिंग ऐप और दूसरे सामान्य ऐप तक सीमित है, तो 8GB रैम आमतौर पर पर्याप्त हो सकती है। ऐसे उपयोग में 12GB रैम रखने से फोन हर समय ज्यादा तेज चलेगा, ऐसा मानना सही नहीं है। बल्कि कई बार 8GB रैम वाला अच्छा फोन 12GB रैम वाले कमजोर फोन से बेहतर अनुभव दे सकता है। इसका कारण यह है कि फोन की पूरी गति केवल रैम तय नहीं करती। 8GB और 12GB में असली अंतर कहां दिखाई देगा? मान लीजिए आप एक साथ बहुत सारे ऐप इस्तेमाल करते हैं। आप किसी संदेश का जवाब देते हुए संगीत सुन रहे हैं, बीच में कैमरा खोलते हैं, फिर बड़ी तस्वीरें संपादित करते हैं, उसके बाद इंटरनेट ब्राउजर में कई पन्ने खोलते हैं और फिर किसी बड़े खेल पर चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में 12GB रैम का फायदा मिल सकता है। फोन ज्यादा ऐप को अपनी रैम में बनाए रख सकता है। इसका मतलब है कि आपको बार-बार ऐप के दोबारा शुरू होने या उसी जगह तक पहुंचने में इंतजार कम करना पड़ सकता है। यानी 12GB का फायदा मुख्य रूप से ज्यादा काम एक साथ संभालने में है, न कि हर काम को तेज करने में। क्या गेम खेलने के लिए 12GB रैम जरूरी है? यह भी पूरी तरह सही नहीं है। फोन में बड़े खेलों के लिए रैम जरूर जरूरी है, लेकिन खेलों की गति और तस्वीरों की गुणवत्ता में ग्राफिक्स प्रोसेसर (GPU) की भूमिका बहुत बड़ी होती है। प्रोसेसर, फोन का तापमान, खेल का बेहतर ढंग से बनाया जाना और भंडारण की गति भी काफी मायने रखते हैं। अगर किसी फोन में बहुत अच्छी ग्राफिक्स क्षमता है लेकिन रैम कम है, तो कुछ स्थितियों में रैम बाधा बन सकती है। लेकिन केवल 12GB रैम होने से कमजोर ग्राफिक्स प्रोसेसर वाला फोन अचानक शानदार गेमिंग फोन नहीं बन जाएगा। यानी खेलों के मामले में केवल रैम देखकर फोन खरीदना ठीक नहीं है। फोन में 5 या 6GB रैम इस्तेमाल होती दिखे तो घबराएं नहीं कई लोग फोन की सेटिंग में जाकर देखते हैं कि 8GB रैम वाले फोन में 5GB या 6GB रैम पहले से इस्तेमाल हो रही है। उन्हें लगता है कि फोन की रैम भर गई है और अब फोन धीमा हो जाएगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। एंड्रॉयड (Android) जैसा ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) उपलब्ध रैम का इस्तेमाल खाली छोड़ने के बजाय काम को बेहतर तरीके से संभालने के लिए करता है। वह जरूरी ऐप और आंकड़े रैम में रख सकता है ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें जल्दी खोला जा सके। इसलिए रैम का कुछ हिस्सा इस्तेमाल होना अपने आप में समस्या नहीं है। असल सवाल यह है कि फोन लगातार ऐप बंद कर रहा है या नहीं, ऐप बार-बार शुरू हो रहे हैं या नहीं और फोन सामान्य काम में धीमा पड़ रहा है या नहीं। ज्यादा रैम से बैटरी ज्यादा खर्च होती है? रैम की मात्रा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि बैटरी निश्चित रूप से बहुत ज्यादा तेजी से खत्म होगी। लेकिन ज्यादा रैम का इस्तेमाल करने वाले भारी काम, लगातार कई ऐप चलाना और बड़े खेल खेलना बैटरी पर असर डाल सकते हैं। फोन में रैम का प्रकार और उसकी ऊर्जा खपत भी मायने रखती है। आज के आधुनिक फोन में एलपीडीडीआर (LPDDR) जैसी कम ऊर्जा खर्च करने वाली रैम तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए केवल 8GB और 12GB की संख्या देखकर बैटरी की अवधि का अंदाजा लगाना सही नहीं होगा। रैम की मात्रा ही नहीं, उसकी तकनीक भी मायने रखती है दो फोन में दोनों के पास 8GB रैम हो सकती है, लेकिन दोनों का प्रदर्शन एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं। रैम की गति और तकनीक भी महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के लिए एलपीडीडीआर4एक्स (LPDDR4X), एलपीडीडीआर5 (LPDDR5) और एलपीडीडीआर5एक्स (LPDDR5X) जैसी अलग-अलग पीढ़ियों की रैम मौजूद हैं। इसके अलावा फोन का प्रोसेसर उस रैम के साथ कितनी अच्छी तरह काम करता है, यह भी मायने रखता है।इसलिए केवल यह देखना कि फोन में 8GB या 12GB रैम है, पर्याप्त जानकारी नहीं देता। स्टोरेज की गति भी फोन को तेज बनाती है एक और चीज जिसे लोग अक्सर भूल जाते हैं, वह है फोन का भंडारण यानी स्टोरेज (Storage)। जब रैम में जगह कम पड़ती है तो फोन को कुछ जानकारी भंडारण में रखनी पड़ सकती है। भंडारण रैम की तुलना में काफी धीमा होता है। इसलिए तेज भंडारण वाली डिवाइस में ऐप खुलने, बड़ी फाइल संभालने और कुछ दूसरे कामों का अनुभव बेहतर हो सकता है। आज के फोन में यूएफएस (UFS) जैसी तेज भंडारण तकनीक का इस्तेमाल होता है। इसलिए नया फोन खरीदते समय केवल रैम नहीं, बल्कि भंडारण की तकनीक और गति भी देखनी चाहिए। 8GB + 8GB आभासी रैम क्या सच में 16GB है? यह फोन कंपनियों का एक ऐसा दावा है जिसे समझना जरूरी है। कई फोन में लिखा होता है कि 8GB वास्तविक रैम के साथ 8GB आभासी रैम (Virtual RAM) भी मिलेगी। इससे ऐसा लग सकता है कि फोन में कुल 16GB रैम है। लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं है। आभासी रैम में फोन अपने भंडारण का कुछ हिस्सा अस्थायी स्मृति के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। भंडारण की गति वास्तविक रैम से काफी कम होती है। इसलिए 8GB वास्तविक रैम और 8GB आभासी रैम को 16GB वास्तविक रैम के बराबर नहीं माना जा सकता।आभासी रैम कुछ स्थितियों में मदद कर सकती है, लेकिन इसे वास्तविक रैम का विकल्प समझना गलत होगा। क्या रैम साफ करने वाले ऐप सच में फोन तेज करते हैं? फोन को बार-बार "रैम साफ" करने की जरूरत आमतौर पर नहीं होती। कई लोग ऐसे ऐप इस्तेमाल करते हैं जो एक बटन दबाते ही रैम में मौजूद सभी ऐप बंद करने का दावा करते हैं। लेकिन इससे हमेशा फोन तेज नहीं होता। उल्टा, अगर आप जिन ऐप को बार-बार इस्तेमाल करते हैं उन्हें लगातार बंद करते रहेंगे तो फोन को उन्हें फिर से शुरू करने में अतिरिक्त काम करना पड़ सकता है। इससे समय और कभी-कभी बैटरी भी ज्यादा खर्च हो सकती है। आमतौर पर एंड्रॉयड का अपना स्मृति प्रबंधन तंत्र यह तय करने के लिए बनाया गया है कि कौन सा ऐप रैम में रखा जाए और कौन सा हटाया जाए। 12GB रैम किन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है? अगर आप फोन पर बहुत ज्यादा काम करते हैं, एक साथ कई बड़े ऐप चलाते हैं, लंबे समय तक भारी खेल खेलते हैं, वीडियो संपादन करते हैं, बड़े दस्तावेजों या तस्वीरों के साथ काम करते हैं या ऐसे ऐप इस्तेमाल करते हैं जिन्हें ज्यादा स्मृति चाहिए, तो 12GB रैम उपयोगी हो सकती है। भविष्य को ध्यान में रखने पर भी 12GB कुछ अतिरिक्त गुंजाइश देती है। जैसे-जैसे ऐप और मोबाइल पर चलने वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित काम ज्यादा जटिल हो रहे हैं, ज्यादा रैम कुछ स्थितियों में मदद कर सकती है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि 8GB वाला फोन कुछ साल बाद अचानक बेकार हो जाएगा। 16GB या 24GB रैम किसके लिए है? 16GB या 24GB रैम वाले फोन भी बाजार में दिखाई देने लगे हैं। लेकिन सामान्य उपयोगकर्ता के लिए इतनी ज्यादा रैम का पूरा फायदा मिलना मुश्किल है। ऐसी क्षमता उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकती है जो फोन पर बहुत भारी काम करते हैं या एक साथ बड़ी संख्या में स्मृति-भारी ऐप और प्रक्रियाएं चलाते हैं। सिर्फ यह सोचकर कि ज्यादा रैम वाला फोन "ज्यादा शक्तिशाली" होगा, 24GB वाला फोन खरीदना जरूरी नहीं है। यह कुछ वैसा ही है जैसे रोज दफ्तर जाने के लिए बहुत बड़ी माल ढोने वाली गाड़ी खरीद लेना। क्षमता ज्यादा जरूर है, लेकिन अगर आपके काम को उसकी जरूरत ही नहीं है तो उस अतिरिक्त क्षमता के लिए पैसा खर्च करने का खास फायदा नहीं होगा। रैम के मामले में एक और महत्वपूर्ण बात, कम होना और ज्यादा होना एक जैसी समस्या नहीं है रैम को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि बहुत कम रैम परेशानी पैदा कर सकती है, लेकिन जरूरत से बहुत ज्यादा रैम अपने आप फोन को तेज नहीं करती। मान लीजिए किसी फोन में इतनी कम रैम है कि आपके रोजमर्रा के इस्तेमाल में ऐप बार-बार बंद हो रहे हैं और दोबारा खोलने पड़ रहे हैं। तब रैम बढ़ाने से अनुभव में बड़ा सुधार आ सकता है। लेकिन अगर 8GB रैम आपके इस्तेमाल के लिए पहले से पर्याप्त है तो 12GB करने पर आपको उतना बड़ा बदलाव महसूस नहीं होगा। इसे घटते लाभ (Diminishing Returns) के रूप में समझा जा सकता है। 4GB से 8GB जाने पर बड़ा फर्क दिखाई दे सकता है। 8GB से 12GB जाने पर फर्क छोटा हो सकता है। 12GB से 16GB जाने पर सामान्य उपयोगकर्ता के लिए यह फर्क और भी कम हो सकता है। नया फोन खरीदते समय सबसे पहले क्या देखें? अगर आपका बजट सीमित है तो केवल ज्यादा रैम के पीछे भागना समझदारी नहीं है। फोन का प्रोसेसर कितना अच्छा है, भंडारण कितना तेज है, सॉफ्टवेयर कितना बेहतर ढंग से बनाया गया है, फोन गर्म होने पर अपनी गति कितनी बनाए रखता है और कंपनी कितने साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट देती है, ये बातें भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसके बाद स्क्रीन, कैमरा, बैटरी और दूसरी सुविधाएं आती हैं। रैम जरूरी है, लेकिन वह फोन की पूरी कहानी नहीं है। यही कारण है कि अच्छी तरह से तैयार किया गया 8GB फोन कई बार खराब तरीके से अनुकूलित (Optimized) किए गए 12GB फोन से बेहतर अनुभव दे सकता है। आखिर 8GB लें या 12GB? अगर आपका इस्तेमाल सामान्य है, तो 8GB रैम पर्याप्त विकल्प है। सोशल मीडिया, इंटरनेट, वीडियो, बैंकिंग, संदेश, तस्वीरें और रोजमर्रा के कामों के लिए आपको 12GB की जरूरत जरूरी नहीं है। अगर आप भारी गेम खेलते हैं, बहुत सारे ऐप एक साथ चलाते हैं, वीडियो या तस्वीरों पर काम करते हैं या फोन को कई साल तक इस्तेमाल करने के लिए अतिरिक्त गुंजाइश चाहते हैं, तो 12GB रैम बेहतर विकल्प हो सकती है। लेकिन दोनों विकल्पों के बीच कीमत का अंतर भी देखिए। अगर 12GB के लिए बहुत ज्यादा अतिरिक्त पैसा देना पड़ रहा है, तो कई मामलों में उस पैसे को बेहतर प्रोसेसर, तेज भंडारण या लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट वाले फोन पर खर्च करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। आखिर में पूरी बात एक लाइन में समझिए। कम रैम समस्या बन सकती है। पर्याप्त रैम समाधान है। लेकिन पर्याप्त से बहुत ज्यादा रैम अपने आप फोन को तेज नहीं बना देती। फोन खरीदते समय इसलिए सिर्फ यह मत पूछिए कि "रैम कितनी है?" असली सवाल होना चाहिए, "मेरे इस्तेमाल के लिए कितनी रैम पर्याप्त है और बाकी हार्डवेयर कितना अच्छा है?"

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