धनबाद में आयोजित समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव के दौरान विहंगम योग संत समाज के 103वें वार्षिकोत्सव का भव्य स्वागत हुआ। संत विज्ञानदेव जी ने योग और विचारों के महत्व पर जोर दिया। 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ का आयोजन 14 और 15 दिसंबर को वाराणसी में होगा।
समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव, विहंगम योग संत समाज के 103वें वार्षिकोत्सव और 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ के उद्देश्य से कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकली स्वर्वेद संदेश यात्रा सोमवार को धनबाद पहुंची। सिटी सेंटर के समीप यात्रा के पहुंचते ही विहंगम योग के अनुयायियों ने संत प्रवर का भव्य स्वागत किया। इसके बाद आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई, जो टाउन हॉल पहुंचकर समाप्त हुई। टाउन हॉल में संत विज्ञानदेव जी ने 'अ' अंकित ध्वज फहराया। इसके बाद अनंत श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी, सद्गुरु धर्मचंद जी और सद्गुरु स्वतंत्रदेव जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।कार्यक्रम में रविंद्र कुमार अम्बष्ट, जीपी सिंह, रामचंद्र तिवारी, विनोद कुमार सिंह, आरडी शर्मा, एपी शेखर, बीपी सिंह, श्रीनाथ यादव, अरुण कुमार गुप्ता, अमित भदानी, बिजेंद्र सिंह, डॉ रणजीत सिंह, राजेश्वर प्रसाद, रामउचित शर्मा, राजू केसरी, कमलेश सिंह, निधि सिंह, किरण सिंह, सुनीता अम्बष्ट उपस्थित थे。
योगी ही उपयोगी : संत विज्ञानदेव जी
विज्ञानदेव जी ने कहा कि हमारे विचार ही हमें सुखी और दुखी बनाते हैं। विचारों से ही मनुष्य सुख और दुख का अनुभव करता है। उन्होंने कहा कि योगी ही उपयोगी होता है, क्योंकि वह सबके हित का चिंतन करता है और दुखियों के दुख को कम करने का प्रयास करता है। जीवन जीने में ही पूरा जीवन बीत नहीं जाना चाहिए, बल्कि जीवन की सार्थकता सेवा में है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता। अच्छाई और बुराई दोनों हर व्यक्ति के भीतर मौजूद हैं। मनुष्य को अपनी दुर्बलताओं और कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए। उन्हें दूर करने की प्रेरणा, शक्ति और सामर्थ्य अध्यात्म के प्रकाश और स्वर्वेद के ज्ञान से प्राप्त की जा सकती है।
14 और 15 दिसंबर को 25 हजार कुंडीय महायज्ञ
जिला संत समाज के प्रधान संयोजक रत्नेश कुमार सिंह ने बताया कि 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ 14 और 15 दिसंबर को वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर परिसर में आयोजित होगा। इसी उद्देश्य से 18 जुलाई को कन्याकुमारी से संकल्प यात्रा का शुभारंभ किया गया था।
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