लॉजिटेक ने भारत में लॉन्च किया एमएक्स कीपैड, डेवलपर्स और एआई वर्कफ्लो के लिए प्रोग्रामेबल कंट्रोल

लॉजिटेक ने भारत में लॉन्च किया एमएक्स कीपैड, डेवलपर्स और एआई वर्कफ्लो के लिए प्रोग्रामेबल कंट्रोल
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Category: SciTech
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नई दिल्ली. डेवलपर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और लगातार डिजिटल टूल्स के साथ काम करने वाले पावर यूजर्स के लिए लॉजिटेक ने भारत में अपना नया एमएक्स कीपैड लॉन्च किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी प्रोग्रामेबल कुंजियां हैं, जिन्हें उपयोगकर्ता अपने काम के अनुसार अलग-अलग कमांड, शॉर्टकट और एआई आधारित कार्यों के लिए सेट कर सकते हैं. कंपनी का कहना है कि इसका उद्देश्य बार-बार किए जाने वाले कार्यों को आसान बनाना और वर्कफ्लो में लगने वाले समय को कम करना है. भारत में एमएक्स कीपैड की कीमत 15,999 रुपये रखी गई है और यह फिलहाल ग्रेफाइट रंग में उपलब्ध है. सामान्य कीबोर्ड के साथ काम करेगा एमएक्स कीपैड एमएक्स कीपैड को पारंपरिक कीबोर्ड के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि उसके साथ इस्तेमाल किए जाने वाले अतिरिक्त उपकरण के रूप में पेश किया गया है. इसमें दिए गए प्रोग्रामेबल कंट्रोल के माध्यम से उपयोगकर्ता उन कमांड और कार्यों को सीधे ट्रिगर कर सकते हैं, जिनका इस्तेमाल वे अपने रोजमर्रा के काम में बार-बार करते हैं. डेवलपर्स के लिए इसका उपयोग कोडिंग से जुड़े कार्यों में किया जा सकता है. किसी कमांड को चलाने, कोड में बदलाव करने, प्रॉम्प्ट मैक्रो इस्तेमाल करने या किसी विशेष प्रक्रिया को शुरू करने जैसे कार्यों के लिए कुंजियों को कॉन्फिगर किया जा सकता है. इससे बार-बार मेन्यू खोलने या सामान्य कीबोर्ड शॉर्टकट का इस्तेमाल करने की जरूरत कम हो सकती है. कई कोडिंग प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेशन कंपनी ने एमएक्स कीपैड को केवल किसी एक सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रखा है. इसे कई डेवलपमेंट और कोडिंग प्लेटफॉर्म के साथ इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया है. इनमें गिटहब कोपायलट, क्लॉड कोड, वीएस कोड और इंटेलीजे आइडिया जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. लॉजिटेक ने गिटहब के साथ मिलकर गिटहब कोपायलट, वीएस कोड और गिटहब कोपायलट एप के लिए नेटिव इंटीग्रेशन भी उपलब्ध कराया है. इसके जरिए समर्थित कार्यों को एमएक्स कीपैड की प्रोग्रामेबल कुंजियों से सीधे शुरू किया जा सकता है. इसका फायदा खास तौर पर उन उपयोगकर्ताओं को मिल सकता है जो एक ही समय में कई डेवलपमेंट टूल्स और एआई असिस्टेंट का इस्तेमाल करते हैं. अलग-अलग एप्लिकेशन के बीच बार-बार स्विच करने के बजाय जरूरी कमांड को एक निर्धारित कुंजी से एक्सेस किया जा सकता है. गिटहब कोपायलट प्रो प्लस का तीन महीने का सब्सक्रिप्शन एमएक्स कीपैड खरीदने वाले ग्राहकों को कंपनी की ओर से गिटहब कोपायलट प्रो प्लस का तीन महीने का सब्सक्रिप्शन भी दिया जा रहा है. यह सुविधा नए और मौजूदा उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है, जिसे लॉजी ऑप्शंस प्लस के जरिए रिडीम किया जा सकता है. गिटहब कोपायलट जैसे एआई आधारित कोडिंग टूल का इस्तेमाल करने वाले डेवलपर्स के लिए यह ऑफर डिवाइस की उपयोगिता को बढ़ा सकता है. हालांकि, सब्सक्रिप्शन को रिडीम करने के लिए कंपनी की निर्धारित प्रक्रिया और पात्रता शर्तों का पालन करना होगा. लॉजी एक्शंस एसडीके से बना सकेंगे कस्टम इंटीग्रेशन एमएक्स कीपैड की एक अहम विशेषता इसका लॉजी एक्शंस एसडीके सपोर्ट है. इसके जरिए डेवलपर्स अपने खास वर्कफ्लो के लिए कस्टम इंटीग्रेशन तैयार कर सकते हैं. यानी अगर किसी डेवलपर के काम के लिए पहले से उपलब्ध कमांड पर्याप्त नहीं हैं, तो वह अपनी जरूरत के हिसाब से नया इंटीग्रेशन तैयार कर सकता है. लॉजिटेक के लॉजी मार्केटप्लेस के माध्यम से ऐसे प्लगइन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं. कंपनी के अनुसार क्लॉड कोड और ओपनएआई कोडेक्स के लिए प्लगइन पहले से उपलब्ध हैं. इनके जरिए एआई एजेंट की स्थिति पर नजर रखने और कमांड लाइन से जुड़े नियंत्रण जैसे कार्य किए जा सकते हैं. इस तरह एमएक्स कीपैड को सिर्फ प्रोग्रामेबल कुंजियों वाला उपकरण न मानकर एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में भी देखा जा सकता है, जिसे डेवलपर्स अपने काम की जरूरत के मुताबिक विस्तार दे सकते हैं. एआई वर्कफ्लो को आसान बनाने पर जोर आज कोडिंग और कंटेंट निर्माण जैसे क्षेत्रों में एआई असिस्टेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में अलग-अलग प्रॉम्प्ट, कमांड और टूल्स के बीच लगातार नेविगेट करना कई उपयोगकर्ताओं के लिए समय लेने वाला काम हो सकता है. एमएक्स कीपैड इसी प्रक्रिया को सरल बनाने पर केंद्रित है. उपयोगकर्ता किसी खास एआई एजेंट या डेवलपमेंट टूल से जुड़े कार्य के लिए कुंजी निर्धारित कर सकता है. एक बार कॉन्फिगरेशन पूरा होने के बाद उसी कुंजी के माध्यम से संबंधित कार्य को सक्रिय किया जा सकता है. कंपनी का दावा है कि उसका प्लेटफॉर्म भविष्य में 10 करोड़ से अधिक संगत लॉजिटेक उपकरणों के बीच इंटीग्रेशन को सपोर्ट करने में सक्षम हो सकता है. इससे कस्टम वर्कफ्लो तैयार करने की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं. डेवलपर कम्युनिटी की भागीदारी लॉजिटेक ने एमएक्स कीपैड को विकसित करने में गिटहब और लॉजिटेक एमएक्स कलेक्टिव कम्युनिटी से मिले इनपुट का भी इस्तेमाल किया है. कंपनी के मुताबिक इसका उद्देश्य ऐसे कंट्रोल उपलब्ध कराना है, जिन्हें उपयोगकर्ता अपने मौजूदा वर्कफ्लो के अनुसार कॉन्फिगर कर सकें. इसका मतलब है कि एमएक्स कीपैड का इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों के लिए एक जैसा सेटअप जरूरी नहीं होगा. कोई उपयोगकर्ता कोडिंग कमांड को प्राथमिकता दे सकता है, जबकि दूसरा एआई एजेंट, एप्लिकेशन लॉन्च या अन्य बार-बार किए जाने वाले कार्यों के लिए कुंजियां निर्धारित कर सकता है. पर्यावरण के लिहाज से भी बदलाव लॉजिटेक ने एमएक्स कीपैड के निर्माण में पुनर्चक्रित प्लास्टिक का भी इस्तेमाल किया है. कंपनी के अनुसार ग्रेफाइट वेरिएंट में 64 प्रतिशत पोस्ट-कंज्यूमर रिसाइकिल्ड प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा उत्पाद की पैकेजिंग में एफएससी प्रमाणित जंगलों और अन्य नियंत्रित स्रोतों से प्राप्त कागज का इस्तेमाल किया गया है. कंपनी की ओर से इसे उत्पाद के निर्माण और पैकेजिंग में स्थिरता पर ध्यान देने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया है. 15,999 रुपये में उपलब्ध होगा एमएक्स कीपैड भारत में लॉजिटेक एमएक्स कीपैड की कीमत 15,999 रुपये तय की गई है. यह ग्रेफाइट रंग में उपलब्ध है. इसकी प्रोग्रामेबल कुंजियां, कई कोडिंग टूल्स के साथ इंटीग्रेशन और कस्टम प्लगइन तैयार करने की सुविधा इसे सामान्य कीबोर्ड से अलग बनाती है. खास तौर पर ऐसे डेवलपर्स और पावर यूजर्स के लिए यह उपकरण उपयोगी हो सकता है, जो अपने रोजमर्रा के डिजिटल वर्कफ्लो में बार-बार एक जैसे कमांड इस्तेमाल करते हैं. लॉजिटेक ने एमएक्स कीपैड के जरिए हार्डवेयर कंट्रोल और एआई आधारित सॉफ्टवेयर वर्कफ्लो के बीच एक सीधा कनेक्शन बनाने की कोशिश की है. Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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