होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का नया दांव, प्रतिबंधित क्षेत्र की चेतावनी से तेल और वैश्विक व्यापार पर संकट

होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का नया दांव, प्रतिबंधित क्षेत्र की चेतावनी से तेल और वैश्विक व्यापार पर संकट
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Category: Politics
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सांकेतिक इमेज (सोर्स- Gemini) फारस की खाड़ी में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा है कि आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर एक नया प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र (Restricted Zone) घोषित किया जाएगा। इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों को ईरान प्रतिबंध सूची में डालने की चेतावनी दी गई है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री गतिविधियों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। हालांकि ईरान ने क्षेत्र की सटीक सीमा, कानूनी स्थिति और इसे लागू करने के तरीके की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जहाजों, बीमा कंपनियों और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा सकता है। होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह संकरा रास्ता दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम है। मध्य-पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों से निकलने वाली बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में कमी वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकती है। हाल के वर्षों में होर्मुज को लेकर कई बार तनाव पैदा हुआ है, लेकिन मौजूदा स्थिति में चिंता इसलिए अधिक है क्योंकि यह विवाद सीधे ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा से जुड़ गया है। ईरान के दावे और अमेरिका से टकराव मोहसिन रेजाई ने कहा कि नया क्षेत्र अमेरिकी नौसेना की कथित नाकेबंदी वाली लाइन से शुरू होगा और फारस की खाड़ी के कुछ हिस्सों तक फैलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों को ईरान की प्रतिबंध सूची में डाला जाएगा। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान अकेले किसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर इस तरह का नियंत्रण लागू कर सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी समुद्री प्रतिबंध की वैधता अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और संबंधित देशों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। जहाजों की आवाजाही में आई कमी समुद्री ट्रैकिंग और कमोडिटी डेटा फर्म केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, तनाव बढ़ने के बाद होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में गिरावट देखी गई है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में यहां से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या औसत स्तर से काफी नीचे आई है। इसका असर तेल बाजार पर भी पड़ा है। खाड़ी क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात में गिरावट की रिपोर्ट सामने आई है। कुछ विश्लेषणों में इसे सामान्य स्तर की तुलना में करीब आधा बताया गया है। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है और स्थिति लगातार बदल रही है। तेल कीमतों पर असर की आशंका होर्मुज में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का सबसे सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। यदि जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा और इसका असर पेट्रोल-डीजल से लेकर वैश्विक महंगाई तक दिखाई दे सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि दुनिया के कई देश वैकल्पिक मार्गों और रणनीतिक तेल भंडारों के जरिए अचानक पैदा होने वाली कमी को संभालने की कोशिश करते हैं। लेबनान और गाजा में जारी तनाव मध्य-पूर्व संकट केवल होर्मुज तक सीमित नहीं है। इजरायल और क्षेत्रीय समूहों के बीच तनाव भी लगातार बना हुआ है। लेबनान और गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और विशेष दूत जेरेड कुशनर ने गाजा नीति को लेकर इजरायल की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आगामी इजरायली चुनावों का असर सरकार के फैसलों पर पड़ रहा है। ईरान पर नए हमले की आशंका का दावा इजरायली मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान और उसके सहयोगी संगठन भविष्य में इजरायल पर बड़े हमले की तैयारी कर सकते हैं। इन दावों में हमास, हिजबुल्ला, हूती और इराकी मिलिशिया समूहों का नाम लिया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से भी इन रिपोर्टों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन्हें खुफिया दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। क्या होर्मुज पूरी तरह बंद हो गया है? ईरान ने प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने की चेतावनी दी है, लेकिन समुद्री मार्ग की कानूनी और वास्तविक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग दावे हैं। ऐसी स्थिति में जहाजों की संख्या में कमी जरूर दर्ज की गई है, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं हुई है। वहीं, दूसरी तरफ बाजार में चिंता बढ़ी है, लेकिन वास्तविक असर तनाव की अवधि और समुद्री मार्गों की स्थिति पर निर्भर करेगा। भारत पर क्या असर पड़ सकता है? भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है। मध्य-पूर्व से आने वाली ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी लंबे व्यवधान का असर भारत की अर्थव्यवस्था, रुपये की कीमत, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि भारत के पास रणनीतिक तेल भंडार और अलग-अलग देशों से आयात के विकल्प मौजूद हैं, जिससे अचानक पैदा होने वाले जोखिमों को सीमित किया जा सकता है।

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