तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नदीमुल हक के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर पार्टी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। टीएमसी की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने इस छापेमारी को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए और इसे 'गंदी राजनीति', 'निचले स्तर की राजनीति' और 'बदले की राजनीति' करार दिया। घोष ने आरोप लगाया कि कार्रवाई का असली निशाना नदीमुल हक नहीं, बल्कि पूरी तृणमूल कांग्रेस थी।
सागरिका घोष ने दावा किया कि जिस परिसर में ईडी ने कार्रवाई की, वह नदीमुल हक का घर नहीं, बल्कि पिछले करीब 10 वर्षों से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का पार्टी कार्यालय है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के जरिए सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस, विपक्षी नेताओं और एक मुस्लिम सांसद को निशाना बनाने की कोशिश की गई है।
'नदीमुल हक के घर पर नहीं, TMC के पार्टी ऑफिस पर हुई रेड'
सागरिका घोष ने कहा कि 7 सितंबर को ईडी ने नदीमुल हक से जुड़े परिसरों में करीब 12 घंटे तक तलाशी ली। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली में जिस जगह तलाशी ली गई, वह सांसद का निजी आवास नहीं, बल्कि पार्टी का कार्यालय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य तृणमूल कांग्रेस को निशाना बनाना था। सागरिका के मुताबिक, विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और उनके खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का सिलसिला लगातार देखने को मिल रहा है।
'मुस्लिम सांसद को निशाना बनाने की कोशिश'
सागरिका घोष ने कार्रवाई को राजनीतिक रंग देते हुए कहा कि नदीमुल हक एक मुस्लिम सांसद भी हैं और इसलिए उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विपक्षी नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं, बल्कि एक मुस्लिम जनप्रतिनिधि को निशाना बनाने का भी मामला है।
उन्होंने आगे कहा कि नदीमुल हक 'अखबार-ए-मशरिक' नाम के चर्चित उर्दू दैनिक के प्रकाशक और संपादक भी हैं। सागरिका ने इसे मीडिया पर हमले से भी जोड़ते हुए कहा कि इस कार्रवाई के जरिए एक मीडिया संस्थान को भी निशाना बनाया गया।
'BJP ने नदीमुल हक को अपने साथ आने का ऑफर दिया था'
सागरिका घोष ने अपने बयान में बीजेपी पर एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने नदीमुल हक से संपर्क कर उन्हें अपने साथ आने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। सागरिका ने कहा कि नदीमुल हक ने जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। सागरिका के मुताबिक, इसी वजह से बीजेपी अब उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि नदीमुल हक ने 'गद्दारी' करने से इनकार किया और पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाने के बजाय टीएमसी के साथ बने रहे।
#WATCH | Delhi: On ED raid at TMC Rajya Sabha MP Nadimul Haque's residence, TMC MP Sagarika Ghose says, "On September 7, the Enforcement Directorate (ED) conducted a 12-hour raid on the premises of Nadimul Haque, who is the Rajya Sabha All India Trinamool Congress Chief Whip. The… pic.twitter.com/pamts5d54d — ANI (@ANI) September 8, 2026
'साम, दाम, दंड, भेद' की राजनीति का लगाया आरोप
सागरिका घोष ने पिछले कुछ महीनों की राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए बीजेपी पर 'साम, दाम, दंड, भेद' की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीजेपी विपक्षी दलों को तोड़ने और नेताओं में दलबदल कराने की कोशिश कर रही है।
उनके मुताबिक, इसी राजनीतिक रणनीति के तहत नदीमुल हक को भी अपने साथ लाने की कोशिश हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब यह कोशिश सफल नहीं हुई तो अब केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ईडी की कार्रवाई में क्या है मामला?
इससे पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक, ईडी ने नदीमुल हक से जुड़े सात परिसरों पर रांची, दिल्ली और कोलकाता में तलाशी ली थी। इनमें कोलकाता के पार्क सर्कस स्थित उनके उर्दू अखबार के कार्यालय समेत अन्य ठिकाने शामिल थे। ईडी सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित 60 करोड़ रुपये के वित्तीय फ्रॉड से जुड़ी जांच के सिलसिले में की गई।
जांच एजेंसी ने कथित तौर पर बैंक रिकॉर्ड, लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। एजेंसी का आरोप है कि अखबार के कार्यालय से कथित तौर पर संदिग्ध वित्तीय लेनदेन किए गए और इसमें तृणमूल कांग्रेस के धन से जुड़े लेनदेन की भी जांच की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, तलाशी के दौरान नदीमुल हक से भी पूछताछ की गई। ईडी की कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर शुरू हुई जांच से जुड़ी बताई गई है।
'जनता सब देख रही है', सागरिका घोष का BJP पर हमला
सागरिका घोष ने अंत में केंद्र सरकार और बीजेपी पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईडी जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई को लेकर जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में जनता बीजेपी को इसका 'मुंहतोड़ जवाब' देगी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि उन्होंने अपने धार्मिक और निजी राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए ऐसी गतिविधियों में हिस्सा लिया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
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