संवाद न्यूज एजेंसी फरीदाबाद। बीते कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव आया है। डिजिटल माध्यम ने पढ़ाई को आसान बनाया है लेकिन इसका असर बच्चों की किताब पढ़ने की आदत पर भी पड़ा है। अब कई बच्चे किताबों के बजाय मोबाइल को ज्ञान का मुख्य साधन मानने लगे हैं।
किसी भी विषय की जानकारी उन्हें वीडियो के माध्यम से आसानी से मिल जाती है। ऐसे में किताब पढ़ने की आदत कहीं न कहीं पीछे छूटती नजर आ रही है। हालांकि, बच्चों को फिर से किताबों से जोड़ने के लिए जिले के विभिन्न स्कूलों में प्रयास किए जा रहे हैं। बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए कहानी लेखन, पुस्तक पठन और अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों को लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ने और लिखने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर स्कूलों में बच्चों की पढ़ने की आदत और लाइब्रेरी के उपयोग को लेकर शिक्षकों से बातचीत की गई। शिक्षकों का कहना है कि डिजिटल माध्यम जरूरी है, लेकिन किताबों का महत्व कम नहीं हुआ है। बातचीत
आज के दौर में किताबें पढ़ना बहुत जरूरी है। बच्चे भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं और किताबों के साथ समय बिता रहे हैं। विद्यालय में 14 सितंबर को पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। - प्रभात मोर, लाइब्रेरियन, केंद्रीय विद्यालय नंबर-2
मैं अपने स्कूल के बच्चों से हमेशा कहती हूं कि पढ़ने के लिए किताबों को भी प्राथमिकता दें। किताबें पढ़ना बहुत जरूरी है। इससे बच्चों की समझ और ज्ञान दोनों बढ़ते हैं। - अनुराधा, प्राचार्या, एनआईटी-3 स्कूल
मुझे कहानी और सामान्य ज्ञान की किताबें पढ़ना अच्छा लगता है। किताबें पढ़ने से नई बातें सीखने और शब्दों का ज्ञान बढ़ाने में मदद मिलती है। - कोमल, छात्रा
मैं स्कूल की लाइब्रेरी से हर सप्ताह किताब लेकर पढ़ती हूं। किताबों से हमें मोबाइल से अलग नई जानकारी और अच्छे विचार मिलते हैं। - अनुष्का, छात्रा
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