जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार सुबह 11 बजे तक सभी बेड मरीजों से फुल हो जाने के कारण मरीजों का इलाज स्ट्रेचर पर लिटा कर करना पड़ा। रामपाल, मीना देवी, शांति, सत्यम और शिवनरायन को तेज बुखार की शिकायत पर परिजनों ने भर्ती कराया था। इन सभी को बेड न मिल पाने के कारण उनका इलाज स्ट्रेचर पर लिटाकर करना पड़ा। इमरजेंसी में ज्यादातर भर्ती मरीज बुखार के थे। ओपीडी में भी भीड़
ओपीडी में डॉक्टरों के कक्षों के बाहर सुबह साढ़े आठ बजे से लगना शुरू हुई मरीजों की कतार दोपहर दो बजे तक लगी रही। ऐसे में मरीजों को डाक्टरी परीक्षण के बाद जांच कराने से लेकर दवा प्राप्त करने में तीन से चार घंटे तक मशक्कत करना पड़ी। शाहिद ने बताया कि डेढ़ घंटे लाइन में लगने के बाद उसे डॉक्टर ने देखा। अब वह दवा के लिए लाइन में खड़े हैं। मालती ने बताया कि डॉक्टर को दिखाने के लिए सुबह नौ बजे अस्पताल आ गए थे। पूरा दिन बीत गया लेकिन जांच नहीं हो पाई। सीएमएस डॉ. जेपी मौर्य ने बताया कि मौसम में बदलाव की वजह से बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सभी मरीजों को बिना परेशानी उचित इलाज मिल सके, इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
चिकनगुनिया और मलेरिया का एक-एक मरीज मिला
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सोमवार को मिली जांच रिपोर्ट के आधार पर बंकी निवासी एक युवक में मलेरिया और मसौली निवासी एक व्यक्ति में चिकनगुनिया के लक्षण पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट के बाद दाेनों को लखनऊ के निजी अस्पतालाें में भर्ती कराया गया। सीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि चिकित्सकों की टीम को जांच के लिए मौके पर भेजा गया है। वहां पर शिविर लगाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राजेश कुशवाहा ने बताया कि हर बुखार स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया नहीं होता है। इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं है।
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