नयी दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी (Education Jayant Chaudhary) ने मंगलवार को कहा कि साक्षरता और शिक्षा (literacy and education) को सशक्तिकरण, रचनात्मकता, सम्मान और सक्रिय नागरिकता के साधन के रूप में फिर से परिभाषित करने की जरूरत है।
चौधरी ने आज यहाँ अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस समारोह (International Literacy Day celebrations) को संबोधित करते हुए कहा कि उल्लास कार्यक्रम शिक्षार्थियों को आत्मविश्वास, गरिमा और समाज में सार्थक भागीदारी के अवसर प्रदान कर रहा है। साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें समझ, ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल साक्षरता भी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने बच्चों में जोखिम उठाने और रचनात्मकता के मूल्यों को विकसित करने पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने बताया कि राज्य के सामूहिक प्रयासों से त्रिपुरा ने 95.6 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल कर ली है, जो भारत सरकार के पूर्ण साक्षर घोषित होने के मानक से अधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अगले तीन-चार वर्षों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मिज़ोरम और सिक्किम के शिक्षा मंत्री विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। शिक्षा मंत्रालय 1 से 14 सितंबर तक पूरे देश में साक्षरता पखवाड़ा आयोजित कर रहा है, जिसमें कार्यशालाएं, सेमिनार, ग्राम पंचायत स्तर के कार्यक्रम, रैलियां और नुक्कड़ नाटक शामिल हैं। इसका उद्देश्य "जन जन साक्षर" के विज़न को साकार करना है।
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