समय पर स्टेट्स रिपोर्ट पेश न करना पड़ा भारी, हिमाचल के शिक्षा सचिव हाईकोर्ट में तलब, स्टाफ की कमी का है मामला

समय पर स्टेट्स रिपोर्ट पेश न करना पड़ा भारी, हिमाचल के शिक्षा सचिव हाईकोर्ट में तलब, स्टाफ की कमी का है मामला
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Category: Politics
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शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा सचिव को एक मामले में समय पर स्टेट्स रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश न करना भारी पड़ा है. हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के शिक्षा सचिव को इस चूक पर निजी रूप से अदालत में तलब किया है. एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को निजी रूप से न्यायालय के समक्ष पेश होने के आदेश जारी किए हैं. मामला स्टाफ की कमी से जुड़ा है. अदालती आदेश के बावजूद समय पर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल न करने को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के प्रति सख्त नाराजगी जताई है. मामले की सुनवाई हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ कर रही है. मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ प्रदेश के स्कूलों में मिनिस्ट्रीयल स्टाफ की कमी से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है. इसी मामले में हिमाचल प्रदेश के शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश होने का आदेश दिया गया है. मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने इसी साल 21 मई को सुनवाई की थी. उस दौरान हुई सुनवाई में राज्य सरकार के शिक्षा सचिव को स्कूलों में मिनिस्ट्रियल स्टाफ की कमी को लेकर विस्तार से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आखिरी अवसर दिया गया था. मामले की सुनवाई सात सितंबर को फिर से तय की गई थी. इस दिन हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने पाया कि राज्य के शिक्षा सचिव की ओर से न तो कोई स्टेटस रिपोर्ट आई और न ही जुर्माने को लेकर न्यायालय को कोई जानकारी दी गई. अदालत में सिर्फ राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा निदेशक की ओर से एक पत्र भेजा गया था. सरकार के इस रवैये से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ और अदालत ने इस पर सख्त नाराजगी जताई. मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने कहा कि ऐसे में उनके पास प्रदेश सरकार के शिक्षा सचिव को निजी तौर पर तलब करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. हाईकोर्ट ने कहा कि अब शिक्षा सचिव को निजी रूप से अदालत में पेश होकर खुद ये बताना होगा कि अदालती आदेश के बावजूद हलफनामा क्यों नहीं दायर किया गया? हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को तय की है. ये भी पढ़ें: सीनियोरिटी, वेतन वृद्धि और अन्य लाभों के लिए गिना जाएगा अनुबंध सेवाकाल, हाईकोर्ट का 83 याचिकाएं एक साथ निपटाते हुए बड़ा फैसला

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