Betul DFA Controversy: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। दैनिक राष्ट्रीय जनादेश द्वारा जिला फुटबॉल संघ में गुपचुप तरीके से बनाए गए नए अध्यक्ष का नाम ओपन करने के बाद खेल गलियारों में हड़कंप मच गया। एक दिन पूर्व ही रविवार को डीएफए के निष्पक्ष और संवैधानिक तरीके से पुनर्गठन करवाने की मांग करने वाले जिले के पूर्व खिलाड़ियों और क्लब सदस्यों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल से मांग की थी। उल्लेखनीय है कि जनादेश ने सोमवार को डीएफए कार्यकारिणी बनने और प्रफुल्ल गोठी के नए अध्यक्ष बनने का समाचार प्रकाशित किया था। जिले के एक फुटबॉल क्लब ने डीएफए का गठन नियम विरूद्ध होने का आरोप लगाते हुए एमपीएफए से इसकी शिकायत कर डीएफए की प्रस्तावित कार्यकारिणी भंग करने और निष्पक्ष चुनाव करवाने की मांग की है। डीएफए की नई कार्यकारिणी गठन में नियमों की अनदेखी का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि न तो डीएफए और ना ही एमपीएफए पदाधिकारियों की सूची सार्वजनिक कर रहे है। एमपीएफए और डीएफए दोनों एक दूसरे को सूची जारी करने के जिम्मेदार बता रहे है।
मप्र फुटबॉल संघ के नियमानुसार किसी भी जिले में जिला फुटबॉल संघ का गठन तब ही हो सकता है जब जिले में एमपीएफए से रजिस्टर्ड कम से कम ६ फुटबॉल क्लब हो। डीएफए के पदाधिकारियों के निर्वाचन सभी रजिस्टर्ड क्लब के अध्यक्ष और सचिव के द्वारा किया जाए जिसमें कम से कम ६ रजिस्टर्ड क्लब की सहभागिता अनिवार्य हो। जानकारी के अनुसार जिले में कुल ६ रजिस्टर्ड फुटबॉल क्लब ही है। इसके लिए डीएफए के गठन के लिए सभी ६ क्लब की सहमति और सहभागिता से ही डीएफए का गठन हो सकता है।
जिले में ६ फुटबॉल क्लब में बैतूल के जयहिन्द, शिवाजी, डीसीसी, बीओएसवी, टेमनी और आमला क्लब एमपीएफए में रजिस्टर्ड है। इनमें से शिवाजी फुटबॉल क्लब के सचिव शारिक खान ने मप्र फुटबॉल एसोसिएशन सचिव का एक सितम्बर को ही पत्र लिखकर जिले में एमपीएफए प्रतिनिधि की उपस्थिति में डीएफए के चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष, लोकतांत्रिक और विधि सूचित प्रक्रिया के माध्यम से आयोजित किए जाने की मांग की थी। इसके बावजूद डीएफए गठन के लिए डीएफए द्वारा शिवाजी क्लब को न तो सूचना दी गई और ना ही उनकी सहमति ली गई। वहीं जयहिंद क्लब और डीसीसी क्लब के प्रतिनिधि भी रविवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से शिकायत करने पहुंचे थे। ऐसे में जिला फुटबॉल संघ के गठन में निर्धारित ६ क्लबों की सहभागिता नहीं हुई और ना ही लोकतांत्रिक निर्वाचन किया गया है, जिससे डीएफए की प्रस्तावित कार्यकारिणी भंग हो सकती है।
डीएफए के पुनर्गठन की बात डीएफए अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल और एमपीएफए सचिव अमित देव दोनों स्वीकार कर रहे है, लेकिन दोनों ही पदाधिकारियों की जानकारी देने से बच रहे है। डीएफए अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल ने रविवार को सिर्फ नवनियुक्त डीएफए प्रफुल्ल गोठी की जानकारी दी बाकी पदाधिकारियों की जानकारी नहीं दी। एमपीएफए सचिव अमित देव से सोमवार को राष्ट्रीय जनादेश ने बात की तो उन्होंने भी डीएफए गठन होने की बात स्वीकार की लेकिन पदाधिकारियों की जानकारी डीएफए अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल या डीएफए सचिव नीरज डागा से लेने की बात कहीं। दोनों ही पदाधिकारियों की जानकारी नहीं दे रहे है जिससे लग रहा है दाल में कुछ काला है।
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