नसीरुद्दुला की विरासत से 2026 के चुनावी समर तक, जानें सबसे अनोखी नगर पालिका नसीराबाद बारे में

नसीरुद्दुला की विरासत से 2026 के चुनावी समर तक, जानें सबसे अनोखी नगर पालिका नसीराबाद बारे में
View on original source
Category: Politics
Share
Archive
Like
अजमेर: साल 1818 में मुगल बादशाह शाह आलम से 'नसीरुद्दुला' यानी 'राज्य का रक्षक' की उपाधि पाने वाले अंग्रेज अफसर सर डेविड ऑक्टरलोनी ने जिस नसीराबाद को बसाया था, वह आज एक नए चुनावी सफर पर है. 1857 की क्रांति का गवाह रहा यह ऐतिहासिक शहर आज अपनी प्रशासनिक पहचान की जंग लड़ रहा है. चुनावी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, पोलिंग पार्टियां रवाना हो गई हैं, और नसीराबाद एक बार फिर अपनी किस्मत का फैसला करने जा रहा है. 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के विद्रोह का गवाह रहा नसीराबाद, आज अपनी सीमाओं के भीतर एक अनोखे प्रशासनिक और भौगोलिक विभाजन से जूझ रहा है. जनसंख्या के आधार पर गठित होने वाली निकायों में यह कभी प्रदेश की सबसे छोटी नगर पालिका थी, लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मुख्य आबादी वाला पुराना शहर सैन्य छावनी बोर्ड के अधीन आता है, जहां नागरिकों के पास अपने ही घरों का मालिकाना हक तक नहीं है. इसी प्रशासनिक पेचीदगी के चलते शहर दो हिस्सों में इस तरह बंट गया कि स्थानीय निवासी इसे 'भारत-पाकिस्तान' की सरहद तक कहने लगे थे. इसे भी पढ़ें- Nikay Chunav 2026: पहले चरण का मतदान कल, 4 नगर निगम समेत 162 निकायों में होगा मतदान साल 2019 के पहले चुनाव में केवल 1,064 मतदाताओं वाली इस नगर पालिका में अध्यक्ष का फैसला भी दिलचस्प तरीके से लॉटरी द्वारा हुआ था. विकास के लिए पर्याप्त सरकारी बजट की कमी और किराए के भवन में चल रहे प्रशासनिक दफ्तर के बावजूद, अब साल 2025 में हुए नए परिसीमन ने यहां की तस्वीर बदल दी है. नांदला, बुबानिया और धोला दांता जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के जुड़ने से अब नगर पालिका का दायरा बढ़ गया है और मतदाताओं की संख्या भी बढ़कर 6,834 हो चुकी है. फिलहाल, रिटर्निंग अधिकारी कल्पित के नेतृत्व में पोलिंग पार्टियां रवाना हो चुकी हैं और कांग्रेस, भाजपा व आरएलपी सहित निर्दलीय उम्मीदवार इस ऐतिहासिक चुनावी रण को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक चुके हैं. दिलचस्प है स्थापना का इतिहास: नसीराबाद के बाहर नांदला ग्रामीण क्षेत्र की जमीन अधिग्रहित कर बनाई गई हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्र को मिलाकर ही नगर पालिका का गठन कर दिया गया. नसीराबाद नगर पालिका क्षेत्र के 20 वार्डों में कुल 1,064 मतदाता थे. 2019 में यहां पहले नगर पालिका चुनाव हुए, तब वार्डों में कम से कम 25 और ज्यादा से ज्यादा 85 मतदाता हुआ करते थे. 2025 में परिसीमन के बाद नांदला, बुबानिया और धोला दांता ग्रामीण क्षेत्र को नगर पालिका में शामिल कर लिया गया. नगर पालिका क्षेत्र का दायरा तो बढ़ा, लेकिन मतदाताओं की संख्या वार्डवार 600 मतदाताओं से कम ही है. नगर पालिका क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या 6 हजार 834 है. नसीराबाद में रिटर्निंग अधिकारी कल्पित ने बताया कि क्षेत्र में चुनाव की तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं और पोलिंग पार्टियों को भी रवाना कर दिया गया है. इसे भी पढ़ें- भरतपुर नगर निगम के 201 बूथों पर कल मतदान, 2.11 लाख मतदाता चुनेंगे अपने शहर की सरकार नसीरुद्दुला ने बसाया था नसीराबाद: नसीरुद्दुला नाम सुनने में मुस्लिम प्रतीत होता है, लेकिन यह एक उपाधि थी जिसका मतलब होता है 'राज्य का रक्षक'. यह उपाधि एक अंग्रेज सैन्य अफसर को मुगल बादशाह शाह आलम ने दी थी, जिसका नाम नसीराबाद के साथ हमेशा-हमेशा के लिए जुड़ गया है. उनका नाम सर डेविड ऑक्टरलोनी था. उन्होंने 1818 में नसीराबाद में सैन्य छावनी बनाई थी. 1857 की क्रांति की शुरुआत मेरठ से हुई थी, लेकिन इसका असर राजस्थान में नसीराबाद सैन्य छावनी में भी हुआ था. यहां 15वीं बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के सैनिकों ने छावनी में शस्त्रागार पर कब्जा कर लिया था और छावनी को आग लगाकर दिल्ली की ओर रवाना हो गए थे, इसलिए नसीराबाद केवल सैन्य छावनी के लिए ही नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है. नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी हेमेंद्र सिंह बताते हैं कि नगर पालिका का गठन 20 वार्डों के साथ हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्र में ही हुआ था. उस वक्त यहां की कुल जनसंख्या 3 हजार थी, जिनमें से मतदाता 1,064 थे, जो अब परिसीमन के बाद क्षेत्र बढ़ने से बढ़कर 6 हजार 834 हो गए हैं. 2019 में हुए पहले चुनाव: नसीराबाद नगर पालिका के चुनाव पहली बार 2019 में हुए. इस चुनाव में 1,064 मतदाता थे. इन चुनावों में 8 सीटों पर कांग्रेस, दो पर निर्दलीय और 10 सीटें भाजपा ने जीती थीं. नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव भी काफी दिलचस्प था. निर्दलीय के सहयोग से कांग्रेस के पास भी 10 सीटें हो गई थीं और भाजपा के पास भी 10 सीटें थीं. कांग्रेस से शारदा मित्तलवाल और भाजपा से अनीता मित्तल अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार थीं. यहां लॉटरी से फैसला हुआ और शारदा मित्तलवाल अध्यक्ष बनीं, लेकिन वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं. भाजपा द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद भाजपा की अनीता मित्तल अध्यक्ष बन गईं. इसे भी पढ़ें- Special : पार्षद बनने के लिए App से लेकर AI तक का इस्तेमाल, हाईटेक हो रहा निकाय चुनाव प्रचार नसीराबाद दो क्षेत्रों में विभक्त: अनीता मित्तल बताती हैं कि नसीराबाद नगर पालिका क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या नसीराबाद का दो भागों में विभक्त होना है. नसीराबाद शहरी क्षेत्र की बड़ी आबादी छावनी क्षेत्र में है, जबकि नगर पालिका क्षेत्र में काफी कम आबादी थी. 2019 में नसीराबाद राजस्थान की सबसे कम मतदाताओं वाली नगर पालिका थी. मित्तल बताती हैं कि नसीराबाद छावनी का आबादी क्षेत्र नगर पालिका से नहीं जुड़ने के कारण लोगों में एक अजीब असमंजस जैसी स्थिति रही. यहां तक कि लोग इस क्षेत्र को 'भारत-पाकिस्तान' कहने लग गए थे. उन्होंने बताया कि छावनी क्षेत्र के आबादी वाले इलाके को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल करने के लिए उनकी ओर से काफी प्रयास भी किए गए, लेकिन यह मामला केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास के बिना अधूरा है. यूडीएच मंत्री के संज्ञान में भी यह मामला है. कम मतदाताओं वाला क्षेत्र होने के कारण नगर पालिका को विकास के लिए बजट भी नहीं मिल पाता है लिहाजा क्षेत्र में होने वाले विकास और सफाई के कार्य नगर पालिका की निजी आय से होते हैं. मित्तल ने यह भी बताया कि नगर पालिका का गठन तो हो गया लेकिन नगर पालिका के लिए भवन तक नहीं है, आज भी नगर पालिका किराए के मकान में चल रही है. इसे भी पढ़ें- निकाय चुनाव का पहला चरण कल: कांग्रेस में दांव पर डोटासरा-जूली समेत 25 से ज्यादा विधायक-सांसदों की साख

(0)Comments

 

A note on cookies

Newshunt uses essential cookies to keep you signed in and to remember your language and country, so the site works the way you expect. With your permission, we'd also like to use analytics cookies to understand how people use Newshunt and improve it over time.

Accepting only affects analytics. To learn more, view our Privacy Policy or Terms & Conditions.