सोते भालू को जगाना पड़ा महंगा, युवक पर लगा ₹5 लाख का जुर्माना; वन्यजीवों से छेड़छाड़ पर सख्ती

सोते भालू को जगाना पड़ा महंगा, युवक पर लगा ₹5 लाख का जुर्माना; वन्यजीवों से छेड़छाड़ पर सख्ती
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Category: Politics
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जंगल में रहने वाले जानवरों के साथ लापरवाही करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। सो रहे भालू को जानबूझकर जगाने की कोशिश करने पर वन विभाग ने उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इस घटना के बाद वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक व्यवहार में दखल को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, व्यक्ति ने जंगल में आराम कर रहे एक भालू को देखा। इसके बाद वह उसके काफी करीब पहुंच गया और उसे जगाने की कोशिश करने लगा। भालू जैसे जंगली जानवर के बेहद करीब जाना और उसे परेशान करना वन्यजीव संरक्षण नियमों का उल्लंघन माना गया। मामले की जानकारी वन विभाग तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने जांच शुरू की। जांच में घटना की पुष्टि होने के बाद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई और उस पर 5 लाख रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया। वन विभाग का उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना है कि जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक वातावरण में परेशान न किया जाए। वन विशेषज्ञों के मुताबिक, सो रहे या आराम कर रहे भालू को अचानक जगाना खतरनाक साबित हो सकता है। अचानक नींद टूटने पर भालू खुद को खतरे में महसूस कर सकता है और आक्रामक प्रतिक्रिया दे सकता है। ऐसे में इंसान और जानवर दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है। आजकल सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने और वायरल होने के चक्कर में कई लोग वन्यजीवों के बेहद करीब पहुंच जाते हैं। कई बार लोग जानवरों को छूने, खिलाने या उन्हें परेशान करने की कोशिश करते हैं, जो न केवल खतरनाक है बल्कि कानूनन अपराध भी हो सकता है। वन विभाग लगातार पर्यटकों और आम लोगों से अपील करता है कि जंगलों में वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें। जानवरों को उनके प्राकृतिक व्यवहार के अनुसार रहने दें और किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचें। वन्यजीव संरक्षण के लिए बने कानून जंगली जीवों को परेशान करने या नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई का प्रावधान रखते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जंगल में इंसानों की जिम्मेदारी केवल घूमने तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां रहने वाले जीवों का सम्मान करना भी जरूरी है। वन्यजीवों को देखने का आनंद तभी सुरक्षित है, जब उनके जीवन और व्यवहार में कोई हस्तक्षेप न किया जाए।

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