हनुमान के जीवन से सीखें निःस्वार्थ सेवा और कर्तव्य पालन - प्रशांत अग्रवाल

हनुमान के जीवन से सीखें निःस्वार्थ सेवा और कर्तव्य पालन - प्रशांत अग्रवाल
View on original source
Category: Blend
Share
Archive
Like
उदयपुर । नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के सानिध्य में चल रही 'अपनों से अपनी बात' कथा में मंगलवार को राम भक्त हनुमान के प्रेरक प्रसंगों का वर्णन किया गया। प्रसंगों के माध्यम से सेवा, त्याग, समर्पण और कर्तव्य पालन की प्रेरणा दी गई। संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि पुण्य और सेवा का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उसमें दिखावे और प्रसिद्धि की इच्छा न हो। दान देते समय यदि मन में अपना नाम सामने आने की अपेक्षा हो, तो सेवा का भाव अधूरा रह जाता है। हनुमानजी का जीवन सिखाता है कि सच्ची भक्ति स्वयं को पीछे रखकर प्रभु के कार्य को आगे बढ़ाने में है। उन्होंने कहा हनुमानजी ने हिमालय की शिलाओं पर अपने नाखूनों से रामकथा लिखी थी। जब उन्हें लगा कि उनकी रचना के कारण वाल्मीकि की रामायण का महत्व कम हो सकता है, तो हनुमानजी ने बिना किसी अहंकार के अपनी लिखी कथा वाली शिलाओं को समुद्र में विसर्जित कर दिया। यह प्रसंग बताता है कि अपनी प्रतिष्ठा से बड़ा किसी दूसरे के प्रयास को सम्मान देना है। यही त्याग सेवा को महान बनाता है। इसके बाद उन्होंने मकरध्वज का प्रसंग सुनाया गया। लंका दहन के बाद हनुमान जी के पसीने की एक बूंद समुद्र में गिरी और उससे मकरध्वज का जन्म हुआ। बाद में वह अहिरावण के अधीन पाताल का द्वारपाल बना। जब अहिरावण राम और लक्ष्मण को पाताल ले गया, तब हनुमानजी उन्हें मुक्त कराने पहुंचे। द्वार पर मकरध्वज ने हनुमानजी को पहचानते हुए भी अपने कर्तव्य से पीछे हटने से इनकार कर दिया। उसने स्पष्ट कहा कि पहले उसे पराजित करना होगा, तभी भीतर प्रवेश संभव है। हनुमान जी ने मकरध्वज को बांधकर पाताल में प्रवेश किया और पंचमुखी रूप धारण कर पांच दीपों को बुझाकर अहिरावण का अंत किया तथा राम-लक्ष्मण को मुक्त कराया। मकरध्वज की कर्तव्यनिष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान राम ने उसे पाताल का राजा बनाया। कथा के समापन पर अग्रवाल ने कहा कि हनुमानजी की भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरतमंद, असहाय और दिव्यांगजनों की मदद के रूप में जीवन में दिखाई दे। बिना नाम और सम्मान की अपेक्षा के किया गया सेवा कार्य ही सच्ची भक्ति है। इस दौरान लाभान्वित दिव्यांगजनों से संवाद कर उनके अनुभव भी जाने गए।

(0)Comments

 

A note on cookies

Newshunt uses essential cookies to keep you signed in and to remember your language and country, so the site works the way you expect. With your permission, we'd also like to use analytics cookies to understand how people use Newshunt and improve it over time.

Accepting only affects analytics. To learn more, view our Privacy Policy or Terms & Conditions.