तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय के एक इशारे को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. विजय ने सोमवार को पुलिस विभाग की अनुदान मांग पर जवाब देते हुए डीएमके और उसके नेताओं पर जमकर निशाना साधा. इसी दौरान उन्होंने अपने दाहिने हाथ से जबड़े को छूते हुए उसे ऊपर उठाने जैसा इशारा किया. इस बॉडी लैंग्वेज को डीएमके और लेफ्ट के नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का मजाक उड़ाने वाला बताया.
दरअसल स्टालिन को इमरजेंसी के दौरान MISA के तहत हिरासत में लिया गया था. उस दौरान उनके साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी और उनके जबड़े में चोट आई थी. इसलिए विजय के इशारे को DMK समेत कुछ लोगों ने स्टालिन की उसी चोट से जोड़कर देखा. सीपीआई(एम) नेता पी. षनमुगम ने विजय पर व्यक्तिगत हमला करने और स्टालिन का बॉडी-शेमिंग करने का आरोप लगाया।
षणमुगम ने X पर एक पोस्ट में कहा, "यह एक जानी-मानी ऐतिहासिक बात है कि भारत में इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र को बचाने के लिए बड़े संघर्ष हुए साथ ही दमन और ज्यादतियां भी हुईं. उस समय पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पर पुलिस ने बेरहमी से हमला किया था, जिससे उनका जबड़ा टूट गया था."
उन्होंने कहा, "किसी के शारीरिक रूप-रंग का मज़ाक उड़ाना निंदनीय है, चाहे कोई भी ऐसा करे; और खुद मुख्यमंत्री का ऐसा करना गैर-ज़िम्मेदाराना हरकत है."
डीएमके विधायकों ने उनके बयानों का विरोध किया और उन्हें रिकॉर्ड से हटाने की मांग की. हंगामा बढ़ने के बाद डीएमके विधायकों को सदन से बाहर भी कराया गया.
एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ED के दस्तावेज़ों और सरकारिया कमीशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सीएम विजय ने एम.के. स्टालिन और उनके बेटे, पूर्व डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के फंड से चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कॉन्ट्रैक्टर्स से "पार्टी फंड" के नाम पर रिश्वत वसूली गई.
DMK के नेताओं ने इन आरोपों का विरोध किया और उदयनिधि स्टालिन की अगुवाई में सदन से वॉकआउट किया.
MISA के इतिहास का ज़िक्र करते हुए विजय ने अपने दाहिने हाथ की हथेली को अपने जबड़े पर रखा. इस इशारे का मतलब स्टालिन के टूटे हुए जबड़े की ओर इशारा माना गया.
इसके बाद विजय ने कहा, "कुछ हद तक तो राजनीतिक शालीनता और मर्यादा होनी चाहिए. इसके बाद, यह उन पर है; अगर वे इसे आगे बढ़ाना चाहें तो बढ़ा सकते हैं, वरना इसे छोड़ भी सकते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "हम जो भी कहें, हम वो लोग हैं जिन्होंने MISA का दौर देखा है. अगर हर बात में MISA को लाया जाए और उन लोगों का ज़िक्र किया जाए जिन्होंने MISA देखा है, तो हमें समझ नहीं आता कि क्या करें."
कार्यवाही से हटाने की मांग खारिज
DMK नेता सीएम की इस टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग कर रहे थे. स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने इस मांग को खारिज कर दिया.
स्पीकर ने कहा, "DMK कल CM विजय का भाषण एक मिनट भी सुनने को तैयार नहीं थी. CM विजय ने MISA एक्ट के बारे में वही बातें कहीं जिनका ज़िक्र पहले ही सदन में हो चुका था. इसलिए, MISA एक्ट पर CM के भाषण को रिकॉर्ड से हटाने की कोई ज़रूरत नहीं है."
विवाद बढ़ने पर CM विजय ने दी सफाई
बवाल बढ़ने के बाद विजय ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि विधानसभा में उनकी बॉडी लैंग्वेज अनायास हुई थी और किसी को व्यक्तिगत तौर पर चोट पहुंचाने के इरादे से नहीं की गई थी.
उन्होंने कहा, "मेरी बॉडी लैंग्वेज का एक्सप्रेशन अनायास ही था. मैं यह बताना चाहता हूं कि यह किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं था."
इसके अलावा उन्होंने कहा, "इसलिए मैं रिक्वेस्ट करता हूं कि इसे किसी की पर्सनल लेवल पर भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किया गया काम न समझा जाए."
तमिलनाडुकी राजनीति में यह विवाद ऐसे वक्त आया है जब विजय और डीएमके के बीच टकराव लगातार तेज हो रहा है. विधानसभा में विजय का डीएमके के पुराने शासन और कथित भ्रष्टाचार पर हमला और उसके जवाब में डीएमके का विरोध इस राजनीतिक लड़ाई को और धार दे रहा है. ऐसे में एक छोटा सा बॉडी-जेस्चर भी अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है.
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