राज्य ब्यूरो, लखनऊ। बेशक 2024 लोकसभा चुनाव में पीडीए फैक्टर और संविधान बदलने के नैरेटिव से भाजपा को नीम चबाना पड़ा, लेकिन अब पार्टी 2027 के विधान सभा चुनाव में बदली रणनीति के साथ उतरेगी। पार्टी प्रदेश को 20-25 क्लस्टरों में बांटेगी, जिसके एक-एक प्रभारी भी नियुक्त होंगे। केंद्रीय समिति, क्लस्टर समिति एवं स्थानीय समिति के रूप में त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था होगी।
विधान सभा क्षेत्रों में राजनीतिक रूप से ज्यादा असर रखने वाली जातियों के नेताओं का गांव में चौपाल लगेगा। वहीं, जातीय समीकरण अपने पक्ष में करने के लिए मोर्चों के सम्मेलन भी होंगे।
पार्टी ने प्रदेश को छह क्षेत्रों, 98 संगठनात्मक जिलों एवं 1912 मंडलों में बांटा है। लेकिन अब भाजपा ढांचे को नया आकार देने के लिए क्लस्टर का फार्मूला तय किया है। क्लस्टरों का आकार प्रदेश के 18 सरकारी मंडलों से थोड़ा छोटा होगा। प्रदेशभर में 20-25 क्लस्टर बनाए जाने हैं, जिसमें प्रत्येक में तीन से चार लोकसभा सीटें और दो दर्जन के आसपास विधान सभा सीटें शामिल होंगी।
जातीय समीकरण साधने की कोशिश
प्रत्येक विधान सभा के प्रभारी बनाए जा रहे हैं, जिनका राजनीतिक अनुभव विधायक से ज्यादा रखने की बात कही गई है। बूथ अध्यक्षों से उनके क्षेत्रों का सामाजिक समीकरण मांगा गया है जिसके आधार पर भाजपा यह तय करेगी कि विधान सभा क्षेत्रों के किन गांवों में कौन-कौन सी जातियों का असर है। पिछले दो चुनावों से क्षेत्र एवं जाति विशेष का वोट किस दल के खाते में जा रहा है।
जातियों में पकड़ रखने वाले पक्ष एवं विरोधी दलों के नेताओं की सूची बनाई गई है। उनके बीच प्रभावी पकड़ रखने वाले नेताओं का गांवों में चौपाल लगाया जाएगा। बाद में इन क्षेत्रों में ओबीसी, अनुसूचित एवं किसान मोर्चे के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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