Sonbhadra News: घरों के खपरैल और फसल क्षतिग्रस्त कर रहे बंदरघरों के खपरैल और फसल क्षतिग्रस्त कर रहे बंदरघरों के खपरैल और फसल क्षतिग्रस्त कर रहे बंदरघरों के खपरैल और फ
Sonbhadra News: म्योरपुर, हिन्दुस्तान संवाद। स्थानीय विकास खंड क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में निवास करने वाले ग्रामीण बंदरों के आतंक से बेघर तो पहले ही हो चुके थे। अब फसलों पर भी इनका कहर बरपने लगा है। स्थिति यह है कि खून पसीने की कमाई अपनी आंखो के के सामने नष्ट होती देख खून के आशू रोने को किसान विवश है। वन विभाग इन बंदरो से सीधा पल्ला झाड़ रहा है।
ग्रामीणों की परेशानियाँ
विकास खंड क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों मे अधिकांश घर मिट्टी के दीवार तथा खपड़ैल छत वाले है। कच्चे मकान मौसम के हिसाब से काफी सुविधाजनक माने जाते है। गर्मी व जाड़े में काफी आरामदेह होते है। बंदरों के आतंक से मिट्टी के इन घरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। बंदरों के उछल कूद तथा उनके भारी भरकम वजन के कारण खपड़े टूट जाने से घर चलनी बन चू रहे है। लोग प्लास्टिक से ढक किसी तरह जीवन यापन को विवश है। वही अब बंदरो का दल तैयार मक्के की फसल को चट कर रहे हैं। किसानों ने जोताई, बीज, खाद, निराई गुड़ाई में जो धन व्यय किया वह डूब रहा है। अपनी आंखो के सामने लागत व मेहनत पर पानी फिरता देख किसान खून के आंसू रो रहे हैं। क्षेत्र के रनटोला, किरवानी, खैराही, गोविंदपुर, गंभीरपुर, कुसम्हां, रासपहरी, कुंडाडीह, डड़ीहरा, परनी, बभनडीहा सहित दर्जनों गांव इस समस्या से त्रस्त है।
किसानों की शिकायतें
ग्रामीण देवशाह, सोमारू, रूपशाह, त्रिभुवन, रामचंद्र, विजय, अमृतलाल, हंसलाल ने बताया कि उनकी फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उनका कहना था कि चालू वर्ष मे अच्छी वर्षा से अच्छी उपज की आशा थी, जिस पर पानी फिर गया है। बंदरों को भागने के सभी उपाय निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं। वन विभाग भी इनको भागने की कोई पहल नहीं कर रहा। इस समस्या पर क्षेत्रीय वन अधिकारी म्योरपुर जबर सिंह यादव ने कहा की बंदरो का हम क्या करे। एक दो हो तो उन्हे पकड़ा भी जा सकता था। भारी संख्या मे बंदरों का होना तथा वनों से गांव का लगा होना ऐसे में इनका क्या किया जा सकता है। वन विभाग का टका सा जवाब किसानों के नुकसान की भरपाई कर सकेगा यह प्रश्न किसानो को तबाह कर रहा है।
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