संवाद सूत्र, अकबरनगर (भागलपुर)। Akbarnagar Flood NH 80 Submerged: गंगा नदी के उफान के बीच अकबरनगर क्षेत्र में बाढ़ की विभीषिका अब केवल रिहायशी बस्तियों और खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इलाके की लाइफलाइन कहे जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भी जलप्रलय का संकट गहरा गया है। अकबरनगर के दो प्रमुख स्थानों पर सड़कों के ऊपर से तेज धार बह रही है। भवनाथपुर में एनएच-80 पर लगातार चौथे दिन जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भवनाथपुर पुलिया से लेकर केनरा बैंक तक करीब 200 मीटर के दायरे में एनएच-80 पर गंगा की तेज धारा बह रही है। इसके चलते भागलपुर और सुल्तानगंज के बीच सीधा सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो गया है और सड़क पर सन्नाटा पसर गया है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन ने मार्ग के दोनों सिरों पर बैरिकेडिंग लगाकर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण रोक लगा दी है।
वैकल्पिक फोरलेन भी जवाब दे गया, दो फीट पानी में जोखिम
संकट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला प्रशासन द्वारा सुझाया गया वैकल्पिक मार्ग— मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन भी अब सैलाब की चपेट में आ गया है। अकबरनगर के पास फोरलेन के ऊपर करीब दो फीट से अधिक पानी तेज रफ्तार से बह रहा है। जिस रास्ते को आपात स्थिति में मुख्य सहारा माना जा रहा था, अब वहां भी सुरक्षित यात्रा का भरोसा समाप्त हो चुका है।
अकबरनगर के भवनाथपुर में लगातार चौथे दिन बढ़ा गंगा का पानी, एनएच-80 पर 200 मीटर हिस्से में तेज बहाव; बैरिकेडिंग कर आवागमन बंद
प्रशासन द्वारा तय वैकल्पिक मार्ग मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन भी डूबा, अकबरनगर के समीप सड़क पर दो फीट से अधिक पानी
भागलपुर-सुल्तानगंज के बीच सड़क संपर्क ठप होने से ट्रेनों पर बढ़ा दबाव, बोगियों में ठसाठस भीड़ के बीच सफर कर रहे यात्री
फोरलेन पर जान जोखिम में डालकर निकल रही हैं छोटी गाड़ियां, दियारा के लोग निजी नावों से ला रहे पशु चारा और खाद्य सामग्री
फोरलेन पर पानी के तेज बहाव के बीच भी भारी गाड़ियां रेंगती हुई निकल रही हैं, लेकिन दोपहिया और छोटी गाड़ियों के लिए यह सफर जानलेवा साबित हो रहा है। सड़क पर पानी की गहराई और गड्ढों का सटीक अंदाजा न लग पाने के कारण छोटी गाड़ियों से चलने वाले लोग अपने परिजनों के साथ जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं, नावों से चारा ढो रहे ग्रामीण
सड़क मार्ग पूरी तरह ठप और वैकल्पिक रास्ते के खतरनाक होने के बाद अब आम जनता के लिए रेलवे ही एकमात्र और आखिरी सहारा बनकर रह गया है। भागलपुर-किऊल रेलखंड पर चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों का भारी सैलाब उमड़ रहा है। अकबरनगर, सुल्तानगंज और भागलपुर जाने वाले दैनिक यात्री किसी तरह ठसाठस भरी रेल बोगियों में लटककर अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।
(0)Comments