Dumka News: झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी मायापुर गांव तक पहुंचने को नहीं है कोई पक्की सड़क

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Dumka News: हिन्दुस्तान विशेष : झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी मायापुर गांव तक पहुंचने को नहीं है कोई पक्की सड़क झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी मायापुर गांव तक पहुंचन Dumka News: अजय कुमार रामगढ़, प्रतिनिधि। झारखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सड़क सुविधा का अभाव विकास के दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है। रामगढ़ प्रखंड की भलसुमार पंचायत अंतर्गत मायापुर गांव इसका एक उदाहरण है, जहां गांव तक पहुंचने के लिए आज भी ग्रामीणों को पक्की सड़क का इंतजार है। बरसात के दिनों में स्थिति इतनी विकट हो जाती है कि ग्रामीणों को नदी-नालों को पार कर आवागमन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। रामगढ़ मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर अंदर स्थित मायापुर गांव में पिछले दिनों से लगातार हुई बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर थी। रास्ते का समुचित निर्माण नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने आवागमन का संकट उत्पन्न हो गया है। पानी से भरे नदी-नालों को पार करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है। ग्रामीणों की कठिनाई स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार गर्मी के दिनों में नदी-नालों में पानी कम रहने के कारण किसी तरह लोग पैदल, साइकिल या अन्य साधनों से आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही यही रास्ता जान जोखिम में डालने वाला बन जाता है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों, विद्यार्थियों, बुजुर्गों और रोजमर्रा के काम के लिए गांव से बाहर जाने वाले लोगों को होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और दैनिक जरूरतों से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। बरसात के मौसम में यदि किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ जाए तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने में परेशानी होती है और कई बार उन्हें पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है। अन्य प्रभावित गांव केवल मायापुर ही नहीं, दर्जनों गांवों की यही है कहानी मायापुर की समस्या कोई अकेली तस्वीर नहीं है। रामगढ़ प्रखंड के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी बेहतर सड़क संपर्क का अभाव है। ग्रामीणों के अनुसार बाबुपुर, बोकना, सहरटोला, जाड़ी, चंदनपहाड़ी, उपरभेलवा, जालवे, पचुवाटिकर सहित अनेक गांव ऐसे हैं, जहां बरसात के दिनों में आवागमन बेहद कठिन हो जाता है। कई गांवों तक साइकिल से पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। एक तरफ राज्य में रोजगार, खनिज संपदा और अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोग आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सवाल यह है कि विकास की प्राथमिकताओं में इन गांवों की सड़कें आखिर कब शामिल होंगी। प्रशासन की प्रतिक्रिया सर्वप्रथम स्थल निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के पश्चात स्थिति को देखकर ही पंचायतीराज मद व अन्य मदों से सड़क निर्माण व पुलिया निर्माण कराया जा सकता है। कमलेंद्र कुमार सिन्हा प्रखंड विकास पदाधिकारी, रामगढ़ फोटो संख्या-15-कमलेंद्र कुमार सिन्हा फोटो संख्या-14-पानी में उतरकर पार करते ग्रामीण

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