देशभर से पहुंचीं 100 से अधिक महिला विधायक और विधान पार्षद
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। महिला जनप्रतिनिधियों की नेतृत्व क्षमता और विधायी समझ को मजबूत करना लोकतंत्र को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महिला विधायकों को संसदीय प्रक्रियाओं, नीतियों और बजट की बारीकियों को समझकर समावेशी शासन को बढ़ावा देना चाहिए। यह बात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सूरजकुंड स्थित ताज सूरजकुंड रिसॉर्ट में आयोजित राष्ट्रीय महिला आयोग की दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कही।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर के नेतृत्व में आयोग की 'शी इज ए चेंजमेकर' पहल के तहत 'महिला विधायकों के लिए जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस' विषय पर कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक महिला विधायक और विधान पार्षद हिस्सा ले रही हैं।
संसदीय प्रक्रियाओं और बजट की समझ जरूरी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद, भागीदारी और जनविश्वास महत्वपूर्ण आधार हैं। महिला जनप्रतिनिधियों की क्षमता मजबूत होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था और बेहतर होगी। उन्होंने महिला विधायकों से संसदीय प्रक्रियाओं, विधायी नीतियों और बजट की बारीकियों को समझने का आह्वान किया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की आवाज बनें
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर ने कहा कि महिला विधायक अपने क्षेत्रों की प्रतिनिधि होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सुशासन की मजबूत आवाज भी हैं। उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों से अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रभावी इस्तेमाल करने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर महिला तक पहुंचे।
चार तकनीकी सत्र हुए-
कार्यशाला में ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी, हरियाणा के मंत्री राजेश नागर, छत्तीसगढ़ की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, केरल की मंत्री बिंदु कृष्णा और केए थुलसी, पश्चिम बंगाल की राज्य मंत्री कलिता मांझी और महिला आयोग के सदस्य सचिव सुदीप जैन मौजूद रहे। पहले दिन नेतृत्व, विधायी कामकाज, सार्वजनिक नीति और जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस पर चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
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