महाराष्ट्र के सिंघम का महा-ऐक्शन! तुकाराम मुंढे के एफडीए कमिश्नर के तौर पर 100 दिन का पूरा रिपोर्ट कार्ड

महाराष्ट्र के सिंघम का महा-ऐक्शन! तुकाराम मुंढे के एफडीए कमिश्नर के तौर पर 100 दिन का पूरा रिपोर्ट कार्ड
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Category: Health
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FDA Commissioner 100 Days Report Card: महाराष्ट्र के प्रशासनिक गलियारों में अपनी कड़क ईमानदारी और सख्त कार्यशैली के लिए मशहूर 2005 बैच के आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपनी आक्रामक कार्रवाई को लेकर देश भर में चर्चा बटोर रहे हैं। महाराष्ट्र फूड FDA के कमिश्नर का कार्यभार संभालने के बाद से ही उन्होंने मिलावटखोरों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एक तरह से जंग छेड़ दी है। तुकाराम मुंढे के 21 साल के शानदार करियर में यह उनका 25वां ट्रांसफर है, जहां उन्होंने 25 मई को एफडीए प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। 25 मई से लेकर 6 सितंबर तक के उनके 104 दिनों के कार्यकाल का पूरा रिपोर्ट कार्ड अब सामने आ चुका है, जिसे देखकर बड़े-बड़े मिलावटखोरों के पसीने छूट गए हैं। आंकड़ों में सिंघम का कहर: 904 छापे, 457 गिरफ्तारियां मुंढे की अगुवाई में एफडीए की टीम ने पूरे महाराष्ट्र में खाने-पीने के गंदे ठिकानों और मिलावटी उत्पादों पर बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक की है। इन 100 से अधिक दिनों के भीतर। पूरे महाराष्ट्र में कुल 904 जगहों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। कानून और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में 457 लोगों को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान 34.7 करोड़ रुपये मूल्य के नकली और मिलावटी खाद्य उत्पाद जब्त किए गए। जब्त किए गए सामानों में नकली पनीर, मिलावटी दूध, गलत लेबल वाले कुकिंग ऑयल और सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक सिंथेटिक रंग शामिल थे। नियमों को ताक पर रखकर जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले 322 प्रतिष्ठानों को तुरंत सील कर दिया गया। IIT बॉम्बे और बॉम्बे हाई कोर्ट की कैंटीन भी रडार पर तुकाराम मुंढे की इस कार्रवाई की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें किसी भी रसूखदार या बड़े नाम को कोई रियायत नहीं दी गई। इस कड़े अभियान की जद में आईआईटी बॉम्बे से लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की कैंटीन भी आईं, जहां नियमों की अनदेखी कर बिना लाइसेंस के रसोईघर संचालित होते पाए गए। सितंबर 2026 तक के चार महीनों में एफडीए ने कुल 12,083 संस्थाओं को नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में खराब स्वच्छता, अप्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी और घटिया दर्जे के कच्चे माल के उपयोग जैसे गंभीर मुद्दे निशाने पर रहे।

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