नई दिल्ली। इंडिया हैबिटैट सेंटर की विजुअल आर्ट्स गैलरी में वसंत डोरा की एकल प्रदर्शनी 'आवेग' शुरू हुई है। यह प्रदर्शनी शहर की सीमाओं से लेकर अस्तित्व के व्यापक संसार तक के सफर को दर्शाती है। क्यूरेटर ज्योति ए. कथपालिया द्वारा आयोजित यह कलाकृति सीमित और असीमित के बीच के रिश्ते को तलाशती है।
प्रदर्शनी में दो प्रमुख शृंखलाएं हैं: हैबिटैट स्केप्स और संसार। हैबिटैट स्केप्स शहरी इमारतों और ढांचों के बीच मानवीय जीवन को दर्शाती है। वहीं, संसार शृंखला अस्तित्व के चक्र, ऊर्जा और आध्यात्मिकता की ओर मुड़ती है। कलाकार ने शिव-शक्ति, पुरुष-प्रकृति और पदार्थ-ऊर्जा के द्वंद्व को कैनवास पर उतारा है। डोरा बताते हैं कि उन्होंने अपनी कृतियों में मानवीय स्थिति को पदार्थ, ऊर्जा, भावनाओं और शक्तियों के रूप में देखने का प्रयास किया है। क्यूरेटर ज्योति ए. कथपालिया के अनुसार, डोरा की कृतियों में वास्तुकार के साथ विचारक, कवि और आध्यात्मिक व्यक्ति भी दिखते हैं। डोरा का कलात्मक सफर
वसंत डोरा एक वास्तुकार रहे हैं। उन्होंने जमशेदपुर में जन्म लिया और चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर से प्रशिक्षण प्राप्त किया। न्यूयॉर्क की स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ बफेलो से स्नातकोत्तर उपाधि हासिल की। शिकागो में कॅरिअर शुरू करने के बाद वे भारत लौटे और करीब चार दशक तक अपनी वास्तुकला परामर्श का संचालन किया। उनकी कला में वास्तुकला की संरचना और स्पेस का प्रभाव स्पष्ट दिखता है।
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