जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। म्यांमार में आतंकी प्रशिक्षण से जुड़े एक मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कोर्ट में सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। इनमें छह यूक्रेनी नागरिक और एक अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। खास बात यह है कि मार्च 2026 में यूएपीए के तहत दर्ज इस मामले में दाखिल आरोपपत्र में फिलहाल यूएपीए की कोई धारा नहीं लगाई गई है।
धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए
फिलहाल, आरोपितों के खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए हैं। ये धाराएं एफआरआरओ (फारेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस) स्तर पर समझौते योग्य अपराध हैं। जबकि आरोपितों की गिरफ्तारी के समय एनआईए ने यूएपीए की धारा 18 (आतंकी साजिश) भी लगाई थी।
एजेंसी बाद में पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकेगी
एनआईए की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) राहुल त्यागी ने दलील दी कि इस संबंध में जांच अभी जारी है। यदि जांच में यूएपीए के तहत अपराध बनता पाया गया तो एजेंसी बाद में पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकती है।
आरोपपत्र विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में दाखिल किया गया। अदालत ने आरोपपत्र पर विचार के लिए एक अक्टूबर की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से राहुल त्यागी के साथ अधिवक्ता जतिन खत्री और अमित रोहिला पेश हुए।
छह यूक्रेनी आरोपितों की ओर से अधिवक्ता नितिन सलूजा और गरिमा सिंह व अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक की ओर से अधिवक्ता रोहित दांद्रियाल और रोहित गौर पेश हुए। 180 दिन से हिरासत में हैं सातों विदेशी
मामले में गिरफ्तार सात आरोपितों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक तथा यूक्रेन के हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होन्चारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। सभी को मई 2026 में गिरफ्तार किया गया था और करीब 180 दिन से हिरासत में हैं।
एनआईए ने आरोप लगाया था कि आरोपित म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार, आतंकी हार्डवेयर और प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे थे। जांच एजेंसी के मुताबिक इन समूहों के संबंध भारत में सक्रिय कुछ प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से भी जुड़े हैं। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपित यूरोप से भारत के रास्ते ड्रोन की बड़ी खेप लेकर आए थे।
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