Delhi PG Building Collapse: हादसे के बाद प्रशासन सख्त, 4 मंजिल से ऊंची अवैध इमारतों पर लटकी सीलिंग की तलवार

Delhi PG Building Collapse: हादसे के बाद प्रशासन सख्त, 4 मंजिल से ऊंची अवैध इमारतों पर लटकी सीलिंग की तलवार
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Category: Politics
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Delhi PG Building Collapse: सैदुलाजाब और विवेक विहार के बाद अब दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने राजधानी में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे अवैध पीजी और हॉस्टलों के खतरनाक नेटवर्क को बेनकाब कर दिया है। हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चार मंजिल से ऊपर बनी सभी अवैध संरचनाओं को तत्काल प्रभाव से सील करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की यह सख्ती सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक है, लेकिन इस कार्रवाई ने राजधानी में रहकर पढ़ाई करने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के सामने गंभीर मानवीय और आवासीय संकट खड़ा कर दिया है। बड़ा सवाल यह है कि यदि पीजी सील हो गए, तो छात्र आखिर कहां जाएंगे? हॉस्टलों का भयंकर टोटा: निजी पीजी माफिया की मजबूरी दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण (2025-26) के आंकड़े बताते हैं कि उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली में हर साल 11 से 12 लाख छात्र पंजीकरण कराते हैं, जिनमें से 42 प्रतिशत से अधिक प्रोफेशनल और टेक्निकल पाठ्यक्रमों के होते हैं। राजधानी में 17 से ज्यादा विश्वविद्यालय हैं, लेकिन छात्रों के अनुपात में संस्थागत आवासीय ढांचा लगभग नगण्य है: डीयू का विसंगतिपूर्ण गणित: अकेले दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में हर साल 80 से 90 हजार नए छात्र दाखिला लेते हैं, जबकि विश्वविद्यालय के पास कुल हॉस्टल क्षमता महज 4,400 सीटों की है। अनियमित बाजार का उभार: 95 फीसदी से अधिक छात्रों को निजी आवास पर निर्भर रहना पड़ता है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर सत्य निकेतन, मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, विजय नगर और कटवारिया सराय जैसे इलाकों में बिना किसी सरकारी नियमन (रेग्युलेशन) के असुरक्षित पीजी का अरबों रुपये का अवैध बाजार खड़ा हो गया है। एक हफ्ते में होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट, डीडीए-एमसीडी की इमारतों में विकल्प की तलाश छात्रों की सुरक्षा को लेकर मचे बवाल के बीच उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कमान संभाली है। उपराज्यपाल ने सोमवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शहरी विकास मंत्री आशीष सूद के साथ उच्चस्तरीय आपात बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। 7 दिन की डेडलाइन: उपराज्यपाल ने सभी प्रमुख छात्र बहुल इलाकों (पीजी हब) में संचालित इमारतों का एक सप्ताह के भीतर व्यापक 'स्ट्रक्चरल ऑडिट' (ढांचागत सुरक्षा जांच) पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मंजिलों की जांच: विशेष रूप से उन भवनों की पहचान की जाएगी, जहां मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन कर चार से पांच मंजिलें अवैध रूप से तान दी गई हैं। वैकल्पिक आवास समिति: छात्रों को अचानक बेघर होने से बचाने के लिए शहरी विकास मंत्री आशीष सूद के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति डीडीए (DDA) और एमसीडी (MCD) की खाली पड़ी या अप्रयुक्त सरकारी इमारतों को अस्थायी स्टूडेंट हॉस्टल में तब्दील करने की संभावनाओं पर काम करेगी। 56 साल पुराना कमजोर ढांचा, बेसमेंट में छेड़छाड़ बनी हादसे की वजह सत्य निकेतन में जमींदोज हुई इमारत की पड़ताल में लापरवाही की भयावह तस्वीर सामने आई है: 1970 की नींव पर खड़ी थीं पांच मंजिलें: यह इमारत करीब 56 वर्ष पुरानी थी। इसका बेसमेंट और भूतल वर्ष 1970 में बना था। इसके 20 साल बाद (1990 में) उसी कमजोर नींव पर तीन अतिरिक्त मंजिलें और खड़ी कर दी गईं। रंग-रोगन कर छात्रों को फंसाया: स्थानीय नागरिकों के अनुसार, जर्जर हालत के चलते यह बिल्डिंग करीब एक साल से बंद पड़ी थी। हाल ही में केवल डेंटिंग-पेंटिंग कर इसे चमकाया गया और बाहर से आने वाले बेखबर छात्रों को किराए पर देकर पीजी शुरू कर दिया गया। अवैध खुदाई से हुआ पतन: उर्मिला गुप्ता नामक महिला के स्वामित्व वाली इस इमारत के बेसमेंट में नए कमरे निकालने के लिए पिलरों और दीवारों से छेड़छाड़ (अल्टरेशन) की जा रही थी, जिसके दबाव में पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। सिर्फ सीलिंग हल नहीं, स्थाई नीति की दरकार विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि केवल बुलडोजर चलाना या अवैध मंजिलें सील कर देना समस्या का अधूरा समाधान है। यदि छात्रों को सुरक्षित, मानकीकृत और किफायती सरकारी या पीपीपी मॉडल पर आधारित आवास नहीं मिले, तो वे एक असुरक्षित इलाके से निकलकर दूसरे असुरक्षित ठिकाने पर जाने को मजबूर होंगे। चुनौती अवैध निर्माण पर नकेल कसने के साथ-साथ 'रेंटल हाउसिंग पॉलिसी' को सख्ती से लागू करने की है।

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