Vajan Kam Karne Ka Tarika: उम्र बढ़ने पर वजन कम करना मुश्किल क्यों होता है? जानिए सही तरीका

Vajan Kam Karne Ka Tarika: उम्र बढ़ने पर वजन कम करना मुश्किल क्यों होता है? जानिए सही तरीका
View on original source
Category: Health
Share
Archive
Like
Vajan Kam Karne Ka Tarika: बीस साल की उम्र में जो डाइट और एक्सरसाइज कमाल का असर दिखाती थी, वही तरीका चालीस या पचास की उम्र में अपनाने पर बमुश्किल कोई फर्क नजर आता है। यह सिर्फ अहसास नहीं है बल्कि शरीर में सच में कुछ बुनियादी बदलाव आते हैं जो वजन घटाने को कठिन बना देते हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि यह असंभव कभी नहीं होता, बस तरीका बदलना जरूरी हो जाता है। समझते हैं कि उम्र के साथ यह मुश्किल क्यों होता है, किस उम्र तक वजन घटाना मुमकिन है, और बड़ी उम्र में इसे सही तरीके से कैसे किया जा सकता है। मांसपेशियां खुद-ब-खुद घटने लगती हैं इस पूरी कहानी की जड़ में है एक प्रक्रिया, जिसे 'सारकोपीनिया' (sarcopenia) कहा जाता है, यानी उम्र के साथ मांसपेशियों का स्वाभाविक रूप से घटते जाना। शोध बताते हैं कि करीब 30 साल की उम्र से ही शरीर हर दशक में औसतन 3 से 5 प्रतिशत मांसपेशी खोना शुरू कर देता है, और 40 की उम्र के बाद यह गिरावट और तेज हो जाती है। 70 के बाद यह रफ्तार लगभग दोगुनी हो जाती है। यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि मांसपेशी शरीर का सबसे ज्यादा एनर्जी खपत करने वाला टिश्यू है। यह आराम की अवस्था में भी लगातार कैलोरी जलाती रहती है। जितनी ज्यादा मांसपेशी होगी, शरीर की बेसल मेटाबॉलिक दर (यानी बिना कुछ किए भी जितनी कैलोरी खर्च होती है) उतनी ही ज्यादा होगी। यानी जैसे-जैसे मांसपेशी घटती है, शरीर अपने आप कम कैलोरी जलाने लगता है। भले ही खाने-पीने या एक्टिविटी में कोई बदलाव न आया हो। यही वजह है कि वही खाना जो बीस की उम्र में वजन नहीं बढ़ाता था, चालीस की उम्र में धीरे-धीरे वजन बढ़ाने लगता है। दिलचस्प बात यह है कि यह गिरावट पूरे शरीर में एक जैसी नहीं होती। शोध बताते हैं कि टांगों की मांसपेशियों में यह कमी सबसे ज्यादा नाटकीय होती है। 20 से 80 साल की उम्र के बीच जांघ की एक बड़ी मांसपेशी का आकार करीब 40 प्रतिशत तक घट सकता है। यही वजह है कि उम्र बढ़ने पर सिर्फ पेट या बांह नहीं, बल्कि पैरों की मजबूती और चलने की क्षमता पर भी खासतौर पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। उम्र के साथ हार्मोनल बदलाव उम्र के साथ शरीर के कई अहम हार्मोन का स्तर भी बदलता है, जो सीधे मांसपेशी बनाने और फैट जमा होने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। टेस्टोस्टेरोन और IGF-1 (एक ग्रोथ हार्मोन) जैसे हार्मोन का स्तर घटने से शरीर की प्रोटीन बनाने और मांसपेशी की मरम्मत करने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है। महिलाओं में यह असर मेनोपॉज़ के दौरान और भी तेज हो जाता है, क्योंकि महिलाओं में शुरुआत से ही पुरुषों के मुकाबले कम मांसपेशी और ज्यादा फैट कोशिकाएं होती हैं। मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोनल बदलाव की वजह से मांसपेशी घटने की रफ्तार और तेज हो जाती है। इसके अलावा शरीर में लगातार बना रहने वाला हल्का सूजन (क्रॉनिक इंफ्लेमेशन) भी उम्र के साथ बढ़ता है, और यह भी मांसपेशी टूटने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। यही वजह है कि सिर्फ हार्मोन ही नहीं, बल्कि शरीर में चल रही सूक्ष्म स्तर की सूजन को कम रखने वाली आदतें, जैसे संतुलित नींद और तनाव प्रबंधन, भी वजन प्रबंधन का उतना ही अहम हिस्सा मानी जाती हैं जितना खाना और एक्सरसाइज। मोटापा और मांसपेशी घटने का दुष्चक्र यहां एक बेहद जरूरी और कम चर्चित पहलू सामने आता है, जिसे 'सारकोपेनिक ओबेसिटी' कहा जाता है, यानी शरीर में मांसपेशी की कमी और चर्बी की अधिकता, दोनों एक साथ मौजूद होना। रिसर्च बताती है कि शरीर की ज्यादा चर्बी सूजन बढ़ाती है और इंसुलिन नाम के हार्मोन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को बिगाड़ देती है, जिससे मांसपेशी और तेजी से घटने लगती है। फिर मांसपेशी घटने से शरीर की सक्रिय रहने की क्षमता भी कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति कम चलता-फिरता है, और यह कमी फिर से ज्यादा चर्बी जमा होने का रास्ता खोल देती है। यानी यह एक ऐसा दुष्चक्र बन जाता है, जिसमें मांसपेशी की कमी और चर्बी की अधिकता एक-दूसरे को लगातार बढ़ावा देते रहते हैं। यही वजह है कि सिर्फ वजन के कांटे पर दिखने वाला आंकड़ा उम्र बढ़ने के साथ कम भरोसेमंद संकेतक बन जाता है। क्योंकि दो लोगों का वजन एक जैसा होने के बावजूद उनकी शरीर की बनावट (कितनी मांसपेशी, कितनी चर्बी) बिल्कुल अलग हो सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ सिर्फ वजन घटाने की बजाय शरीर की बनावट सुधारने पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। किस उम्र तक वजन घटाना मुमकिन है? यहां एक बात समझनी जरूरी है, वजन घटाने की कोई ऐसी आखिरी उम्र सीमा नहीं है जिसके बाद यह पूरी तरह नामुमकिन हो जाए। शोध साफ तौर पर बताते हैं कि सही तरीके से किया गया वजन प्रबंधन बुजुर्ग उम्र में भी उतना ही असरदार हो सकता है, बस इसके लिए तरीका बदलना जरूरी है। बड़ी उम्र में सिर्फ खाना कम करने से वजन तो घट सकता है लेकिन इसमें मांसपेशी और हड्डी का नुकसान भी उतना ही ज्यादा हो सकता है, जो कमजोरी और गिरने के खतरे को बढ़ा देता है। यही वजह है कि डॉक्टर अक्सर सिर्फ कितना वजन कम हुआ" की बजाय वजन घटने के साथ कितनी मांसपेशी बची रही, इस पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह देते हैं, खासकर 55 साल की उम्र के बाद। इसीलिए बड़ी उम्र में वजन कम करने की योजना हमेशा किसी डॉक्टर या डाइटीशियन की निगरानी में बनाना कहीं ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। बड़ी उम्र में सही तरीका क्या है? अच्छी बात यह है कि रिसर्च ने कुछ बेहद ठोस और असरदार रणनीतियां बताई हैं, जो बड़ी उम्र में भी कारगर साबित होती हैं। 1. सिर्फ डाइट नहीं, रेजिस्टेंस ट्रेनिंग जरूरी है शोध बार-बार यही दिखाते हैं कि सिर्फ कैलोरी घटाने की बजाय, इसके साथ रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (वेट या बॉडीवेट एक्सरसाइज) जोड़ना ही सबसे असरदार तरीका है, क्योंकि यह चर्बी घटाने के साथ-साथ मांसपेशी को बचाए रखने में मदद करता है। बिना एक्सरसाइज के सिर्फ खाना कम करना, हड्डी और मांसपेशी दोनों के नुकसान का खतरा बढ़ा सकता है। एक शोध यह भी बताता है कि सिर्फ रेजिस्टेंस ट्रेनिंग अकेले वजन घटाने के लिए उतनी कारगर नहीं होती जितनी यह चर्बी घटाने और मांसपेशी बचाने में होती है, इसलिए इसे हल्की एरोबिक गतिविधि (जैसे तेज चलना) के साथ मिलाना कहीं बेहतर नतीजे देता है। 2. प्रोटीन पर ज्यादा ध्यान दें रिसर्च से यह साफ तौर पर सामने आया है कि उम्र बढ़ने पर प्रोटीन की सामान्य अनुशंसित मात्रा अक्सर पर्याप्त नहीं रह जाती। बड़ी उम्र में मांसपेशी बचाने और वजन घटाने, दोनों के लिए सामान्य से ज्यादा प्रोटीन लेने की सलाह दी जाती है। यह किसी डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह से तय किया जाए तो बेहतर होगा क्योंकि सही मात्रा हर व्यक्ति की सेहत की स्थिति पर निर्भर करती है। प्रोटीन के लिए अच्छे स्रोतों में लीन चिकन, मछली, दालें, टोफू, अंडे, नट्स और दूध शामिल हैं। इन्हें दिनभर के खाने में समान रूप से बांटकर लेना चाहिए।सिर्फ एक बार में ज्यादा प्रोटीन लेने के मुकाबले ये मांसपेशी बनाने की प्रक्रिया के लिए ज्यादा असरदार पाया गया है। 3. पोषण की गुणवत्ता पर ध्यान दें, सिर्फ मात्रा पर नहीं बड़ी उम्र में शरीर को ऊर्जा की जरूरत भले ही कम हो जाए, लेकिन विटामिन और मिनरल की जरूरत उतनी ही या कभी-कभी ज्यादा बनी रहती है। इसलिए क्रैकर या चिप्स जैसे कम पोषण वाले स्नैक्स की जगह ताजे फल, सब्जियां और पोषण से भरपूर चीजें चुनना बेहतर रहता है, ताकि कम कैलोरी में भी शरीर को पूरा पोषण मिल सके। विटामिन डी और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व भी मांसपेशी के टूटने की प्रक्रिया को धीमा करने में मददगार माने जाते हैं, इसलिए इन्हें भी डाइट का हिस्सा बनाना फायदेमंद हो सकता है, हालांकि किसी भी सप्लीमेंट की शुरुआत डॉक्टर की सलाह के बाद ही करनी चाहिए। 4. धीरे और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ें बड़ी उम्र में तेज, अचानक वजन घटाने की बजाय धीमी, सतत रफ्तार से आगे बढ़ना ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ माना जाता है। किसी भी कैलोरी-प्रतिबंधित डाइट को शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन से मिलकर एक व्यक्तिगत योजना बनाना बेहतर रहता है, क्योंकि हर व्यक्ति की सेहत की स्थिति, दवाइयां और शारीरिक जरूरतें अलग होती हैं। 65 साल से ऊपर के लोगों के लिए आमतौर पर सुझाव दिया जाता है कि वे हफ्ते में कम से कम 150 मिनट हल्की एरोबिक गतिविधि और हफ्ते में दो दिन मांसपेशी मजबूत करने वाली एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, यह एक अच्छा शुरुआती ढांचा है, जिसे अपनी क्षमता के हिसाब से आगे बढ़ाया जा सकता है। वैज्ञानिक तरीका अपनाएं उम्र बढ़ने के साथ वजन घटाना मुश्किल जरूर हो जाता है, लेकिन इसकी वजह सिर्फ इच्छाशक्ति की कमी नहीं, बल्कि शरीर के भीतर हो रहे असली, मापे जा सकने वाले बदलाव हैं, घटती मांसपेशी, बदलते हार्मोन, और मांसपेशी-चर्बी का दुष्चक्र। कोई भी उम्र ऐसी नहीं जिसके बाद वजन घटाना पूरी तरह नामुमकिन हो जाए, बस इसके लिए तरीका बदलना जरूरी है। वजन घटाने से जुड़ी कोई भी योजना शुरू करने से पहले, खासकर बड़ी उम्र में, कृपया डॉक्टर या डाइटीशियन से सलाह जरूर लें, क्योंकि सही तरीका हर व्यक्ति की सेहत की स्थिति पर निर्भर करता है।

(0)Comments

 

A note on cookies

Newshunt uses essential cookies to keep you signed in and to remember your language and country, so the site works the way you expect. With your permission, we'd also like to use analytics cookies to understand how people use Newshunt and improve it over time.

Accepting only affects analytics. To learn more, view our Privacy Policy or Terms & Conditions.