खनिज से भरे 2 राज्यों को करीब लाएगा 600 किमी का ईवे, लगेंगे ₹12000 करोड़

खनिज से भरे 2 राज्यों को करीब लाएगा 600 किमी का ईवे, लगेंगे ₹12000 करोड़
View on original source
Category: Business
Share
Archive
Like
नई दिल्ली. देश में कई ऐसे एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर हैं जिनकी चर्चा दिल्ली-मुंबई या गंगा एक्सप्रेसवे जितनी नहीं होती, लेकिन इनका असर बड़े औद्योगिक इलाकों पर पड़ता है. रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर भी ऐसा ही प्रोजेक्ट है. करीब 627 किमी लंबा यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और कोयला, स्टील, खनिज और दूसरे औद्योगिक माल की आवाजाही आसान करेगा. इस कॉरिडोर का करीब 384 किमी हिस्सा छत्तीसगढ़ में है. इसका मकसद रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक इलाकों को झारखंड के धनबाद, रांची और जमशेदपुर के कोयला-स्टील बेल्ट से बेहतर तरीके से जोड़ना है. इससे माल ढुलाई का समय और लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की उम्मीद है. जनवरी 2026 में लोकसभा में दिए गए सरकारी जवाब के मुताबिक, कॉरिडोर के कई हिस्सों पर पहले से काम चल रहा था. बिलासपुर-उरगा सेक्शन की लंबाई 70.20 किमी है. इसमें 69.01 किमी काम पूरा हो चुका था, यानी करीब 1.19 किमी हिस्सा बाकी था. इसे जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था. इसके आगे उरगा-पत्थलगांव सेक्शन की 80.585 किमी लंबाई में 53.57 किमी काम पूरा हो चुका था. करीब 27.02 किमी काम बाकी था और इसकी संभावित पूरी होने की तारीख अगस्त 2026 बताई गई थी. ये भी पढ़ें: 161 किमी का नया एक्सप्रेसवे काटेगा ट्रैफिक का झंझट, 6 लेन की सड़क से जुड़ेंगे दर्जनों इलाके 104 किलोमीटर का बड़ा हिस्सा इसके बाद पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर तक 104.25 किमी का बड़ा हिस्सा है. जनवरी में इस हिस्से में 87% जमीन का फिजिकल पजेशन मिल चुका था और फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पहला चरण भी मिल गया था. अप्रैल 2026 में एनएचएआई ने इसी हिस्से पर 3,147 करोड़ रुपये के निवेश से जमीन पर निर्माण शुरू होने की जानकारी दी. झारखंड बॉर्डर से गुमला तक 32 किमी के हिस्से में जनवरी 2026 तक 68% जमीन का पजेशन मिल चुका था. यहां भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पहला चरण मिल चुका था और वर्किंग परमिशन की प्रक्रिया चल रही थी. झारखंड में गुमला-पलमा के 63 किमी और पलमा-रांची के 23 किमी हिस्से पूरे हो चुके थे. वहीं ओरमांझी-गोला के 28 किमी हिस्से में 87% और गोला-बोकारो के 32 किमी हिस्से में 75% फिजिकल प्रोग्रेस दर्ज की गई थी. बोकारो-धनबाद का 57 किमी हिस्सा भी पूरा हो चुका था. कितना पैसा लग रहा है इस पूरे 627 किमी कॉरिडोर के लिए एक ही कुल लागत बताने के बजाय अलग-अलग पैकेज की लागत तय की गई है. बिलासपुर-उरगा के 70.20 किमी सेक्शन की परियोजना लागत पुराने सरकारी दस्तावेज में 2,192 करोड़ रुपये बताई गई थी. उरगा-पत्थलगांव सेक्शन की डीपीआर में कुल परियोजना लागत करीब 2,261 करोड़ रुपये थी. सबसे नए बड़े हिस्से यानी पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर तक 104.25 किमी के लिए 3,147 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. वहीं छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर से गुमला-भद्रा तक के बड़े पैकेज को पीपीपीएसी ने 4,472.78 करोड़ रुपये की परियोजना लागत के साथ मंजूरी दी थी. 104 किमी वाले हिस्से में क्या खास पत्थलगांव-कुनकुरी से झारखंड बॉर्डर तक का 104.25 किमी हिस्सा इस कॉरिडोर के सबसे अहम हिस्सों में है. इसमें 4 लेन की सड़क के साथ बड़ी संख्या में पुल, फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जा रहे हैं. एनएचएआई के मुताबिक इस रूट पर कुल 382 छोटे-बड़े स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं. इनमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर और 1 एलिवेटेड वायाडक्ट शामिल हैं. इसके अलावा वाहनों, हल्के वाहनों, पैदल यात्रियों और मवेशियों की आवाजाही के लिए अलग-अलग अंडरपास और 278 बॉक्स कलवर्ट भी बनाए जा रहे हैं. किन शहरों और इलाकों को फायदा यह कॉरिडोर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक इलाकों को झारखंड के धनबाद, रांची और जमशेदपुर से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा. जशपुर जिले के लिए भी यह प्रोजेक्ट खास है. पत्थलगांव, कांसाबेल, कुनकुरी, दुलदुला और जशपुर जैसे इलाकों को बेहतर सड़क नेटवर्क मिलेगा. इससे कोयला, खनिज, स्टील और दूसरे सामान की आवाजाही आसान होने के साथ स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर इसलिए सिर्फ एक लंबी सड़क परियोजना नहीं है. इसका असली महत्व देश के मध्य हिस्से को पूर्वी भारत के खनिज और औद्योगिक बेल्ट से जोड़ने में है. अभी इसके कई हिस्से पूरे हो चुके हैं, कई निर्माणाधीन हैं और कुछ हिस्सों में जमीन तथा दूसरी मंजूरियों का काम चल रहा है.

(0)Comments

 

A note on cookies

Newshunt uses essential cookies to keep you signed in and to remember your language and country, so the site works the way you expect. With your permission, we'd also like to use analytics cookies to understand how people use Newshunt and improve it over time.

Accepting only affects analytics. To learn more, view our Privacy Policy or Terms & Conditions.