मिट्टी से बन रही बिजली! वैज्ञानिकों ने खोजी अनोखी तकनीक, बैक्टीरिया पैदा कर रहे हैं करंट

मिट्टी से बन रही बिजली! वैज्ञानिकों ने खोजी अनोखी तकनीक, बैक्टीरिया पैदा कर रहे हैं करंट
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Category: SciTech
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क्या आपने कभी सोचा है कि जिस मिट्टी पर हम चलते हैं, वही बिजली भी बना सकती है? विज्ञान की दुनिया में ऐसी ही एक अनोखी तकनीक पर काम किया जा रहा है, जिसमें मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव (बैक्टीरिया) बिजली पैदा करने में मदद कर रहे हैं। इस तकनीक को सॉइल माइक्रोबियल फ्यूल सेल (Soil Microbial Fuel Cell) कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मिट्टी में मौजूद कुछ खास बैक्टीरिया जैविक पदार्थों को तोड़ते समय इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं। इन इलेक्ट्रॉनों को इलेक्ट्रोड की मदद से इकट्ठा किया जाता है और इसी प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है। यानी मिट्टी के अंदर चलने वाली प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया को ऊर्जा में बदला जा रहा है। कैसे बनती है मिट्टी से बिजली? इस तकनीक में मिट्टी के अंदर एक इलेक्ट्रोड (एनोड) लगाया जाता है और ऊपर की ओर दूसरा इलेक्ट्रोड (कैथोड) रखा जाता है। मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव जैविक पदार्थों को ऊर्जा के लिए इस्तेमाल करते हैं और इस दौरान इलेक्ट्रॉन बाहर निकालते हैं। ये इलेक्ट्रॉन एक बाहरी सर्किट से गुजरते हैं, जिससे बिजली पैदा होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मिट्टी में मौजूद कार्बनिक पदार्थ और बैक्टीरिया इस प्रक्रिया के लिए ईंधन का काम करते हैं। अलग-अलग तरह की मिट्टी में बिजली उत्पादन की क्षमता भी अलग हो सकती है। जिन मिट्टियों में जैविक कार्बन ज्यादा होता है, वहां बिजली उत्पादन बेहतर पाया गया है। खेती और दूरदराज इलाकों में उपयोग की उम्मीद इस तकनीक को भविष्य में छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सेंसर और दूरदराज क्षेत्रों में ऊर्जा उपलब्ध कराने के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सोलर और विंड एनर्जी के साथ-साथ मिट्टी आधारित जैव ऊर्जा भी एक उपयोगी विकल्प बन सकती है। खास बात यह है कि यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से मौजूद सूक्ष्म जीवों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा मिट्टी में मौजूद प्रदूषकों को कम करने और पर्यावरण सुधार में भी माइक्रोबियल फ्यूल सेल की भूमिका पर शोध हो रहा है। अभी हैं कुछ चुनौतियां हालांकि मिट्टी से बिजली बनाने की यह तकनीक अभी बड़े स्तर पर इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं है। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम मात्रा में पैदा होने वाली बिजली को बढ़ाना है। मौजूदा सिस्टम से बिजली उत्पादन काफी सीमित है, इसलिए इसे व्यावहारिक और सस्ता बनाने के लिए लगातार शोध जारी है। भविष्य में अगर इस तकनीक में सुधार होता है तो खेतों की मिट्टी, गीली जमीन और जैविक कचरे वाले क्षेत्रों से छोटी मात्रा में ऊर्जा पैदा की जा सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले समय में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई दिशा दे सकती है। मिट्टी से बिजली बनाने का विचार भले ही अभी नया और अनोखा लगे, लेकिन यह साबित करता है कि प्रकृति में छिपी ऊर्जा को सही तकनीक के जरिए उपयोग में लाया जा सकता है।

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