बेसिक शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सर्वे में 104 स्कूल ऐसे चिह्नित किए गए थे, जिनके भवन या परिसर के ऊपर से बिजली की लाइन गुजर रही थी। इनमें से 96 स्कूलों से लाइन शिफ्टिंग का काम पूरा करा दिया गया है। शेष 8 स्कूलों से लाइन हटाने के लिए ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता को पत्र लिखा गया है। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए ऊर्जा निगम को एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि दी जा चुकी है। इन 8 स्कूलों से भी इसी माह के अंत तक लाइन हटाने का लक्ष्य रखा गया है। बीएसए ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के स्कूलों में जर्जर तार, झुके हुए खंभे और स्कूल परिसर के पास लगे ट्रांसफार्मर की नियमित निगरानी करें और कोई भी खामी मिलने पर तत्काल ऊर्जा निगम को सूचना दें, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। चार साल पहले झुलस गया था छात्र प्रशांत, अभी तक नहीं ट्रांसफार्मर
सिकंदराबाद देहात। गांव आढा में पीएम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय है, जहां स्कूल के मुख्य गेट के बाहर ही बिजली का ट्रांसफार्मर मौत बनकर खड़ा है। स्कूल के प्रधानाध्यापक कुकील खान ने बताया कि इस ट्रांसफार्मर को हटाने के लिए कई बार ऊर्जा निगम अधिशासी अभियंता को लिखित में अवगत कराया जा चुका है लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि हर समय हादसे का डर बना रहता है। यही वह स्कूल है जहां 4 साल पहले एक बड़ा हादसा हो चुका है। कक्षा 7 के छात्र प्रशांत के पिता विनोद ने बताया कि 4 साल पहले बेटा प्रशांत स्कूल के बाहर रखे ट्रांसफार्मर में करंट की चपेट आकर झुलस गया था। गनीमत रही कि उस समय लोगों ने बचा लिया लेकिन तब से लेकर आज तक विभाग ने कोई सुध नहीं ली। इसी स्कूल में पढ़ने वाले नैतिक की दादी राजेश्वरी ने बताया कि बच्चे स्कूल तो जाते हैं पर मन में हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। बारिश के मौसम में तो खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जनहित में इस ट्रांसफार्मर को तत्काल स्कूल परिसर से दूर शिफ्ट किया जाए, ताकि कोई बड़ा हादसा होने से बचाया जा सके।
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