आगरा में बैंक मैनेजर की सतर्कता से एक बुजुर्ग साइबर ठगों के हाथों 81 लाख रुपए गंवाने से बच गए। साइबर ठगों ने बुजुर्ग को दो दिन से डिजीटल अरेस्ट किया हुआ था। उनको देने के लिए बुजुर्ग जब बैंक में आरटीजीएस करने पहुंचे तो बैंक मैनेजर की सूझबूझ से बुजुर्ग
अब जानिए पूरा मामला केनरा बैंक आवास विकास शाखा प्रबंधक रवि यादव ने बताया कि मंगलवार दोपहर 12 बजे उनके पास एक बुजुर्ग आए। वो करीब 81 लाख रुपए की RTGS कराने बैंक शाखा पहुंचे। एक दिन पहले ही उन्होंने FD बंद कर खाते में ट्रांसफर की गई थी।
जब उन्होंने ने बुजुर्ग से इतनी बड़ी रकम किसी दूसरे स्थान पर भेजने का कारण पूछा। उन्होंने बताया कि यह पैसा उनके बेटे ने संपत्ति खरीदने के लिए भेजने को कहा है।
मैनेजर ने बेटे का मोबाइल नंबर मांगा तो बुजुर्ग ने कहा कि उन्हें नंबर याद नहीं है और मोबाइल नंबर घर पर रखा है। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने रकम पाने वाले लाभार्थी की जानकारी मांगी, लेकिन उसका विवरण भी बुजुर्ग उपलब्ध नहीं करा सके।
खाते के लेन-देन का पैटर्न भी लगा संदिग्ध पूछताछ के दौरान बुजुर्ग ने बताया कि वह और उनकी पत्नी घर पर अकेले रहते हैं। बैंक मैनेजर को बातचीत और परिस्थितियां सामान्य नहीं लगीं। इसके बाद उन्होंने खाते का स्टेटमेंट निकलवाकर पिछले लेन-देन का पैटर्न देखा। इसमें भी कुछ गतिविधियां असामान्य और संदिग्ध नजर आईं।
इसके बाद बैंक मैनेजर ने बुजुर्ग को बिना बताए बैंक के एक अधिकारी को बुजुर्ग के घर भेजा गया। उद्देश्य यह पता लगाना था कि परिवार के किसी अन्य सदस्य को इस लेन-देन की जानकारी है या नहीं और संयुक्त खाताधारक से इसकी पुष्टि की जा सके।
महिला बैंक अधिकारी को घर में नहीं आने दिया जब बैंक की महिला अधिकारी घर पहुंचाी तो वहां पर एक बुजुर्ग महिला थीं। बैंक कर्मी ने घर के अंदर जाना चाहा तो उन्हें अंदर आने की अनुमति नहीं दी गई। उनसे पूछताछ में भी सहयोग नहीं किया गया। इसी बीच बैंक शाखा में मौजूद बुजुर्ग के व्यवहार और घर से मिले कुछ अन्य संकेतों ने बैंक अधिकारियों का संदेह और बढ़ा दिया।
मैनेजर ने बुजुर्ग से कहा कि अगर जरूरी दस्तावेज और जानकारी घर पर है तो वह बैंक अधिकारियों के साथ घर चलकर सत्यापन करा दें। बुजुर्ग इसके लिए तैयार हो गए, लेकिन शाखा से निकलते समय उन्होंने कहा कि वह अपनी गाड़ी से जाएंगे और बैंक अधिकारी पीछे-पीछे आएं। बुजुर्ग गाड़ी से निकले, लेकिन अपने घर नहीं पहुंचे।
पुत्रवधू के सामने खुला साइबर ठगी का राज इसके बाद बैंक मैनेजर दो अन्य अधिकारियों, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल थीं, के साथ बुजुर्ग के घर पहुंचे। परिवार के किसी सदस्य से फोन पर बात कराने का अनुरोध किया गया। कुछ देर बाद बुजुर्ग की पुत्रवधू सामने आईं। वह पेशे से अधिवक्ता हैं। शुरुआत में उन्होंने बैंक अधिकारियों से सवाल किया कि बिना किसी सूचना या अपॉइंटमेंट के वे घर क्यों पहुंचे हैं।
बैंक मैनेजर ने उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी और व्यक्तिगत रूप से मिलने का अनुरोध किया। पुत्रवधू करीब एक घंटे बाद पुत्रवधू बैंक पहुंचीं। जब बैंक मैनेजर ने उन्हें पूरी घटना बताई तो पुत्रवधू ने जानकारी की। इसके बाद पता चला कि उनके ससुर साइबर फ्रॉड के जाल में फंसे थे। इसके बाद बुजुर्ग ने पूरी कहानी बताई। उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल पर एक कॉल आया था।
इसमें उनके नंबर से करोड़ों का फ्रॉड होने की बात कही गई। इसके बाद फर्जी पुलिसवालों ने उन्हें डराया। उनके खातों की जानकारी ले ली। रुपए न देने पर परिवार के सदस्यों को मारने की धमकी दी। इससे डरकर ही उन्होंने अपनी एफडी तुड़वाई थी। उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि उनकी सतर्कता के कारण उनके ससुर की जीवनभर की बचत ठगी का शिकार होने से बच गई।
81 लाख नहीं, बुजुर्ग की जिंदगीभर की कमाई थी बैंक अधिकारियों के मुताबिक, बुजुर्ग लगातार रकम ट्रांसफर कराने पर जोर दे रहे थे। उनका कहना था कि पैसा उनका है और वह जब चाहें, जिसे चाहें भेज सकते हैं। ऐसे में बैंक अधिकारियों के लिए उन्हें रोकना आसान नहीं था।
लेकिन बैंक मैनेजर ने परिस्थितियों को देखते हुए जल्दबाजी में लेन-देन करने के बजाय लगातार सत्यापन कराया। बैंक अधिकारियों की सतर्कता, पूछताछ और परिवार से संपर्क करने की कोशिश के चलते करीब 81 लाख रुपए की रकम साइबर ठगी का शिकार होने से बच गई।
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