Last Updated on September 8, 2026 10:03 pm by INDIAN AWAAZ
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भारतीय शेयर बाजारों में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके साथ ही वैश्विक बॉन्ड यील्ड में मजबूती, महंगाई को लेकर बढ़ती आशंकाओं और ब्याज दरों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने बाजार धारणा को कमजोर किया।
भारत के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि देश अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत के आयात बिल, चालू खाते, रुपये की विनिमय दर और घरेलू महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने मंगलवार को विशेष रूप से बैंकिंग, तेल एवं गैस तथा आईटी शेयरों में बिकवाली की।
बीएसई सेंसेक्स 555.23 अंक यानी 0.73 प्रतिशत गिरकर 75,577.58 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 144.05 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 23,635.10 अंक पर बंद हुआ। लगातार दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स अब कुल 1.23 प्रतिशत और निफ्टी 1.10 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
निफ्टी में गिरावट को मुख्य रूप से बड़े भार वाले शेयरों में कमजोरी ने बढ़ाया। आईसीआईसीआई बैंक 1.97 प्रतिशत, रिलायंस इंडस्ट्रीज 1.11 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.06 प्रतिशत टूटे। इन प्रमुख कंपनियों में गिरावट का असर बेंचमार्क सूचकांकों पर भी पड़ा।
निफ्टी 23,650 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ। निजी बैंकों के साथ-साथ तेल एवं गैस और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला।
हालांकि व्यापक बाजार में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 0.27 प्रतिशत बढ़ा, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.17 प्रतिशत की तेजी रही।
बाजार का दायरा हालांकि कमजोर रहा। बीएसई पर कुल 2,096 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,291 शेयरों में गिरावट रही। कुल 239 शेयर अपरिवर्तित रहे।
दिलचस्प रूप से बाजार में अस्थिरता का संकेतक इंडिया VIX 0.51 प्रतिशत घटकर 11.10 पर आ गया। इससे संकेत मिलता है कि प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद निकट अवधि की अस्थिरता को लेकर निवेशकों में अभी अत्यधिक घबराहट नहीं है।
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। नवंबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 2.04 डॉलर यानी 2.12 प्रतिशत बढ़कर 98.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
ब्रेंट के 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंचने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए जोखिम बढ़ गया है। लंबे समय तक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहने पर पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा परिवहन, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स की लागत भी बढ़ सकती है।
कंपनियों के लिए इसका सीधा असर उत्पादन और परिवहन लागत पर पड़ सकता है, जबकि उपभोक्ताओं के लिए महंगे ईंधन का असर वास्तविक खर्च करने की क्षमता पर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ती चिंताओं ने तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम को और बढ़ाया है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी संभावित व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में और तेजी की आशंका है।
कच्चे तेल की तेजी ने वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंता फिर बढ़ा दी है। अमेरिका में 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 0.27 प्रतिशत बढ़कर 4.797 प्रतिशत हो गई।
ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आमतौर पर उभरते बाजारों के लिए चुनौती बनती है, क्योंकि इससे विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है। इसका असर भारत जैसे बाजारों में पूंजी प्रवाह और रुपये पर पड़ सकता है।
बाजार में सितंबर की अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैठक को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशक अब 25 बेसिस प्वाइंट की दर वृद्धि की संभावना को 60 प्रतिशत से अधिक मान रहे हैं। इस सप्ताह आने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़े फेड की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रहा। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया 94.8300 प्रति डॉलर के आसपास रहा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.5650 पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल की महंगाई और रुपये की कमजोरी का दोहरा दबाव भारत के लिए महत्वपूर्ण है। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से आयातित कच्चे तेल की लागत रुपये में और बढ़ जाती है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि डॉलर इंडेक्स 0.23 प्रतिशत गिरकर 98.96 पर आ गया।
भारत की 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड मामूली रूप से घटकर 6.951 प्रतिशत रही, जबकि पिछले सत्र में यह 6.957 प्रतिशत थी।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की तेजी का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में ज्यादातर प्रमुख सूचकांक निचले स्तर पर बंद हुए, जबकि यूरोपीय शेयर बाजारों में भी कमजोरी रही।
अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को लेबर डे की छुट्टी के बाद दोबारा खुलने वाला था और शुरुआती संकेत सतर्कता के थे। डॉव फ्यूचर्स करीब 400 अंक नीचे थे।
यूरोपीय बाजारों में निवेशकों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ी कि ऊंची ऊर्जा कीमतें महंगाई को बढ़ाते हुए आर्थिक गतिविधियों को कमजोर कर सकती हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक स्टैगफ्लेशन का जोखिम बढ़ सकता है।
निवेशक अमेरिका और कनाडा के बीच फिर उभर रहे व्यापार तनाव पर भी नजर रखे हुए हैं। कनाडा करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर जवाबी शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विमान निर्माता बॉम्बार्डियर को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और संकेत दिया है कि यदि कंपनी अमेरिका में विमानों का निर्माण नहीं करती तो उसके लिए अमेरिकी बाजार में बिक्री मुश्किल हो सकती है।
व्यापार तनाव ऐसे समय में बढ़ रहा है जब वैश्विक बाजार पहले ही भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई, ब्याज दरों और ऊर्जा कीमतों को लेकर दबाव में हैं।
प्राथमिक बाजार में दीप ज्वैलर्स के शेयरों ने बीएसई पर मजबूत शुरुआत की। शेयर 221.05 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो 177 रुपये के इश्यू मूल्य से 24.89 प्रतिशत प्रीमियम था।
कारोबार के दौरान शेयर 222.10 रुपये के उच्चतम और 193.10 रुपये के न्यूनतम स्तर तक गया। अंत में यह 194.30 रुपये पर बंद हुआ, जो इश्यू मूल्य से 9.77 प्रतिशत अधिक है। बीएसई पर कंपनी के 35.07 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।
इसके विपरीत रेज ऑफ बिलीफ के शेयर 228.05 रुपये पर बंद हुए, जो 239 रुपये के इश्यू मूल्य से 4.50 प्रतिशत नीचे है। शेयर 239 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ था और कारोबार के दौरान 239 रुपये के उच्चतम तथा 228 रुपये के न्यूनतम स्तर पर रहा।
Sansera Engineering के शेयर 3.30 प्रतिशत बढ़कर 4,025 रुपये पर पहुंच गए। एक विदेशी ब्रोकरेज ने कंपनी पर कवरेज शुरू करते हुए 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग दी और 4,954 रुपये का लक्ष्य मूल्य तय किया।
Polycab India 1.36 प्रतिशत बढ़कर 8,373.50 रुपये पर पहुंचा। विदेशी ब्रोकरेज ने कंपनी पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखते हुए 11,100 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया।
Garuda Construction and Engineering में 1.56 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनी की सहायक इकाई Dream City Builders को सऊदी अरब के जेद्दा में 93 मंजिला लैंडमार्क टावर के निर्माण का ठेका मिला है। परियोजना से करीब 1,800 करोड़ रुपये के राजस्व की संभावना जताई गई है।
सबसे उल्लेखनीय तेजी GE Vernova T&D में रही, जिसका शेयर 8.77 प्रतिशत उछल गया। कंपनी को Power Grid Corporation of India से नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) टर्मिनल स्टेशन स्थापित करने का ठेका मिला है।
परियोजना में 6,000 मेगावाट क्षमता वाले ±800 kV HVDC LCC टर्मिनल स्टेशन की डिजाइन और स्थापना शामिल है। इसमें 3,000 मेगावाट के दो टर्मिनल होंगे और इसका उद्देश्य Barmer II से South Kalamb तक नवीकरणीय बिजली की निकासी में मदद करना है।
Shiprocket का शेयर 0.97 प्रतिशत गिरा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में समेकित शुद्ध घाटा घटकर 13.71 करोड़ रुपये रहने की जानकारी दी, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में घाटा 18.03 करोड़ रुपये था। हालांकि परिचालन से राजस्व 33.81 प्रतिशत घटकर 592.08 करोड़ रुपये रहा।
Organic Recycling Systems 4.11 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने Bharat Petroleum Corporation से कुल 167.30 करोड़ रुपये के दो EPCOM ठेके हासिल किए हैं।
Sri Lotus Developers and Realty 1.36 प्रतिशत गिरा। कंपनी की सहायक इकाई को मुंबई के वर्सोवा, अंधेरी पश्चिम स्थित मॉडल टाउन में एक आवासीय पुनर्विकास परियोजना के डेवलपर के रूप में नियुक्त किया गया है।
Symphony में 5.72 प्रतिशत की जोरदार तेजी रही। कंपनी ने भारत में रूम एयर कंडीशनर, BLDC सीलिंग फैन और एयर प्यूरिफायर जैसे उत्पादों में चरणबद्ध तरीके से विस्तार की योजना की घोषणा की है।
कंपनी के संस्थापक-प्रमोटर, चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अचल अनिल बेकर अपनी व्यक्तिगत हिस्सेदारी से करीब 3.43 लाख इक्विटी शेयर, यानी कंपनी की कुल इक्विटी का लगभग 0.5 प्रतिशत, उपहार के रूप में देने की योजना बना रहे हैं। मौजूदा बाजार कीमतों पर इन शेयरों का मूल्य करीब 20 करोड़ रुपये है। ये शेयर कर्मचारियों, पूर्व कर्मचारियों, हाउसकीपिंग स्टाफ के पति/पत्नी, माता-पिता या निकट संबंधियों तथा फैमिली ऑफिस को उपहार के रूप में दिए जाएंगे।
प्राथमिक बाजार में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही। Pranav Constructions के आईपीओ को 8 सितंबर को शाम 4:33 बजे तक 40,16,68,320 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 2,24,63,137 शेयर पेश किए गए थे। इस तरह इश्यू 17.88 गुना सब्सक्राइब हुआ।
इश्यू 7 सितंबर को खुला था और 9 सितंबर को बंद होगा। इसका मूल्य दायरा 118 से 124 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 120 शेयरों की है।
Prasol Chemicals के आईपीओ को 21,93,158 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 54,43,229 शेयर पेश किए गए थे। इश्यू 0.40 गुना सब्सक्राइब हुआ है। इसका मूल्य दायरा 643 से 676 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम लॉट 22 शेयरों का है। इश्यू 8 सितंबर को खुला और 10 सितंबर को बंद होगा।
Glass Wall Systems (India) को 3,99,44,414 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 1,64,57,298 शेयर पेश किए गए थे। इश्यू 2.43 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 172 से 182 रुपये और न्यूनतम लॉट 82 शेयरों का है।
Kanohar Electricals को 3,06,45,430 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 1,16,93,326 शेयर पेश किए गए थे। इश्यू 2.62 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 601 से 632 रुपये प्रति शेयर और न्यूनतम लॉट 23 शेयरों का है।
आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, मध्य पूर्व के घटनाक्रम, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करेगी।
यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत के आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत, यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और तेल कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।
फिलहाल बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों का अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन और चुनिंदा आईपीओ में मजबूत निवेश मांग यह संकेत देती है कि घरेलू बाजार में जोखिम लेने की क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि वैश्विक परिस्थितियों के कारण निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
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