Courtesy: Social Media
देहरादून: हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धीकरण को लेकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. यह कार्रवाई अधिवक्ता अंजू की शिकायत पर की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद मैदान का शुद्धीकरण कराया गया. इसे अनुसूचित जाति के व्यक्ति के प्रति जातिगत भेदभाव और अपमान की भावना से जोड़ा गया है. पुलिस अब शुद्धीकरण में शामिल लोगों की पहचान के साथ वायरल वीडियो की भी जांच कर रही है.
तहरीर के मुताबिक, 8 अगस्त को रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यक्रम आयोजित हुआ था. इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को कुछ लोगों ने मैदान का कथित तौर पर शुद्धीकरण कराया. इस घटना से जुड़े फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा.
जातिगत भेदभाव का लगाया गया आरोप
अधिवक्ता अंजू की शिकायत में कथित शुद्धीकरण को अनुसूचित जाति के व्यक्ति के प्रति भेदभाव और अपमान की भावना पैदा करने वाला बताया गया है. शिकायत में यह भी कहा गया कि ऐसी घटना से सामाजिक स्तर पर गलत संदेश जाता है. पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
वीडियो के जरिए धार्मिक वैमनस्य फैलाने का आरोप
तहरीर में एक वीडियो का भी जिक्र किया गया है, जिसे भ्रामक और संभावित रूप से संपादित बताया गया है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इसके जरिए धार्मिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश की गई. पुलिस अब वीडियो की वास्तविकता, उसके मूल स्रोत और उसमें किसी तरह की काट-छांट किए जाने की जांच करेगी.
अज्ञात लोगों की पहचान में जुटी पुलिस
एसएसपी डा. मंजुनाथ टीसी के अनुसार, अधिवक्ता अंजू की तहरीर पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है. अब कथित शुद्धीकरण कार्यक्रम में शामिल अज्ञात लोगों की पहचान की जा रही है. साथ ही सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.
15 अगस्त को दी गई थी तहरीर
पुलिस को यह शिकायत 15 अगस्त को दी गई थी. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब जांच आगे बढ़ाई जा रही है. पुलिस वीडियो के मूल स्रोत से लेकर उसकी एडिटिंग और प्रसार से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करेगी. इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस और महिला अधिवक्ता की ओर से उठाई गई मांग पर पुलिस ने औपचारिक कार्रवाई शुरू कर दी है.
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