शाहपुर क्षेत्र के शहजादी हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी कोर्ट नंबर-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने दोषी पति नदीम को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने घटना को विरल से विरलतम श्रेणी का अपराध माना है। कोर्ट ने धारा 302 के तहत नदीम को फांसी की सजा के साथ एक लाख रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतने के आदेश दिए हैं। एडीजीसी कुलदीप कुमार ने बताया कि शाहपुर थाने में दिलशाद ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया था कि उनकी बेटी शहजादी की शादी 10 जनवरी 2015 को नदीम निवासी सितारा मस्जिद, कस्बा शाहपुर साथ हुई थी।
शादी के बाद उनकी बेटी का ससुराल पक्ष के लोग उत्पीड़न करते थे। दहेज में बाइक व एक लाख रुपये मांगते थे। उसकी बेटी ने पुत्र को जन्म दिया, इसके बाद भी ससुराल के लोग तंग करते रहे। आरोप था कि 23 जुलाई 2018 की रात करीब आठ बजे शहजादी के साथ पति नदीम, ननद सोनी, सास शमशीदा ने मारपीट की। उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर उसे जिंदा जला दिया। आरोपी मेरठ के अस्पताल में शहजादी को छोड़कर फरार हो गए थे। जहां से उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। लगभग 98 प्रतिशत झुलसी शहजादी की 28 जुलाई 2018 को उपचार के दौरान मौत हो गई।विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप-पत्र दाखिल किया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने सुनवाई के बाद ननद को दोषमुक्त कर दिया, जबकि सास की मौत होने पर उसकी फाइल उपशमित कर दी गई। सोमवार को कोर्ट ने पति नदीम फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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