एक दिन, दो हादसे और तीन मौतें! बेगूसराय में बाढ़ के पानी ने उजाड़ दिए तीन परिवार, 5 साल की मासूम भी नहीं बची

एक दिन, दो हादसे और तीन मौतें! बेगूसराय में बाढ़ के पानी ने उजाड़ दिए तीन परिवार, 5 साल की मासूम भी नहीं बची
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BEGUSARAI: गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बेगूसराय में बाढ़ का पानी अब लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। मंगलवार को जिले के अलग-अलग इलाकों में हुए दो दर्दनाक हादसों में तीन जिंदगियां बाढ़ के पानी में समा गईं। बलिया प्रखंड में स्नान करने के दौरान चार लड़कियां गहरे पानी में डूब गईं, जिनमें दो की मौत हो गई। वहीं, बछवाड़ा थाना क्षेत्र में खेलते समय बाढ़ के पानी में गिरने से महज पांच साल की मासूम बच्ची की जान चली गई। तीन मौतों की खबर से दोनों इलाकों में मातम पसर गया है। मृतकों के परिवारों में चीख-पुकार मची है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्नान करने गईं चार लड़कियां गहरे पानी में डूबीं, दो की मौत पहली घटना बलिया थाना क्षेत्र के परमानंदपुर पंचायत स्थित हुसैना गांव के मिर्जापुर चौक के समीप की है। मंगलवार को बाढ़ के पानी में स्नान करने के दौरान चार लड़कियां अचानक गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। लड़कियों को डूबता देख आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। शोर सुनकर ग्रामीण और नाविक मौके पर पहुंचे और तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। काफी प्रयास के बाद दो लड़कियों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया गया, जबकि सपना कुमारी और आकांक्षा कुमारी गहरे पानी में लापता हो गईं। 21 वर्षीय सपना और 14 वर्षीय आकांक्षा ने गंवाई जान हादसे में हुसैना गांव निवासी शैलेंद्र कुमार की 21 वर्षीय पुत्री सपना कुमारी और प्रिंस कुमार की 14 वर्षीय पुत्री आकांक्षा कुमारी की मौत हो गई। सपना कुमारी शादीशुदा थीं, जबकि आकांक्षा आठवीं कक्षा की छात्रा थीं। एक ही गांव की दो बेटियों की मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने काफी देर तक दोनों की तलाश जारी रखी। मशक्कत के बाद सपना कुमारी का शव बरामद कर लिया गया। वहीं, दूसरी ओर आकांक्षा की तलाश के लिए प्रशासन की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। एनडीआरएफ ने चलाया सर्च ऑपरेशन, मिला आकांक्षा का शव घटना की सूचना मिलने के बाद बलिया एसडीएम अजय यादव के निर्देश पर एनडीआरएफ की टीम को घटनास्थल पर भेजा गया। टीम ने गहरे पानी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटे की मशक्कत के बाद 14 वर्षीय आकांक्षा कुमारी का शव भी बरामद कर लिया गया। शव मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। मेला देखने नानी के घर गई थी पांच साल की लक्ष्मी, बाढ़ के पानी ने छीन ली जिंदगी दूसरी दर्दनाक घटना बछवाड़ा थाना क्षेत्र के बिसौवा चक्की इलाके की है। यहां खेलते-खेलते बाढ़ के पानी में गिरने से पांच साल की मासूम बच्ची की मौत हो गई। मृतका की पहचान चमथा नंबर वार्ड-3 निवासी बबलू महतो की पांच वर्षीय पुत्री लक्ष्मी कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, लक्ष्मी कुमारी मेला देखने के लिए अपने नाना अर्जुन महतो के घर गई थी। मंगलवार को वह घर के आसपास अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान खेलते-खेलते वह घर के आगे जमा बाढ़ के गहरे पानी की ओर चली गई और अचानक उसमें गिर गई। जब तक परिजनों की नजर बच्ची पर पड़ी और उसे पानी से बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। मासूम की मौत की खबर मिलते ही नानी घर से लेकर उसके माता-पिता के घर तक कोहराम मच गया। जिस बच्ची के मेला देखने और परिवार के बीच खुशियां बांटने की उम्मीद थी, उसकी मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा घटना की सूचना मिलते ही बछवाड़ा थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया। लक्ष्मी की मौत के बाद उसके नाना-नानी और माता-पिता समेत परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण भी इस घटना से स्तब्ध हैं। तीन मौतों ने बढ़ाई चिंता, बाढ़ के पानी से सावधानी की जरूरत एक ही दिन जिले में बाढ़ के पानी से जुड़े दो हादसों में तीन लोगों की मौत ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण जिले के दियारा और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी लगातार फैल रहा है। कई जगह घरों और रास्तों के आसपास पानी जमा है। ऐसे में बाढ़ के पानी में स्नान करने, बच्चों को पानी के आसपास खेलने देने और बिना जानकारी वाले रास्तों से आवाजाही करने में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। बाढ़ का पानी ऊपर से शांत दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके नीचे गहराई, कटाव और तेज बहाव का खतरा बना रहता है। इन हादसों ने यह भी साफ कर दिया है कि बाढ़ के पानी को लेकर जरा सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। खासकर बच्चों को बाढ़ के पानी के आसपास अकेला छोड़ना और गहरे पानी में स्नान करना जानलेवा साबित हो सकता है। बलिया की दो बेटियों और बछवाड़ा की पांच साल की मासूम की मौत ने बाढ़ की उस भयावह तस्वीर को सामने ला दिया है, जिसमें कुछ पल की लापरवाही पूरे परिवार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देती है।

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