मुंगेर में भूमि विवाद के मामले में जयराम यादव के हत्या के प्रयास के 11 वर्ष पुराने मामले में तीन दोषियों को 7-7 वर्ष की सजा सुनाई गई है। दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। घटना 22 जुलाई 2015 की है, जब जयराम एक बोरे में जख्मी अवस्था में मिला था।
मुंगेर, एक संवाददाता। भूमि विवाद में जयराम यादव की हत्या के प्रयास के करीब 11 वर्ष पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय राकेश कुमार सिंह की अदालत ने सोमवार को 3 दोषियों को 7-7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही सभी पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। ज्ञात हो कि, इसी मामले में नामजद 3 अन्य आरोपियों को पूर्व में साक्ष्य के अभाव में रिहा किया जा चुका है। सेशन वाद संख्या- 356/2018 में सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष की ओर से हाईकोर्ट से आए अधिवक्ता तथा अभियोजन पक्ष की दलील सुनने के बाद अदालत ने नया रामनगर थाना क्षेत्र के बारिस टोला निवासी जयराम यादव की हत्या के प्रयास के मामले में उसके गोतिया सुरेश यादव, मनोज यादव एवं पवन कुमार रंजन को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक राम सेवक मंडल ने बहस में हिस्सा लिया। जबकि, कोर्ट नायाब आरती कुमारी ने गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कराने में सहयोग किया।
बोरे में बंद मिला था जख्मी जयराम:
घटना 22 जुलाई 2015 की है। जयराम यादव दोपहर में खाना खाने के बाद घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। इसके बाद उसकी पत्नी सरिता देवी ने स्थानीय थाने को सूचना दी। अगले दिन खोजबीन के दौरान जयराम यादव अम्बेडकर नगर गांव में योगेंद्र यादव के खेत में जूट के बोरे में बंद, जख्मी और बेहोशी की हालत में मिला। उसे तत्काल सदर अस्पताल, मुंगेर लाया गया। यहां से रेफर होने के बाद में कई दिनों तक पटना में उसका इलाज चला। इस मामले में जयराम की पत्नी सरिता देवी के बयान पर उसके ही गोतिया के 8 लोगों के खिलाफ नया रामनगर थाना कांड संख्या- 117/2015 दर्ज किया गया था।
तीन आरोपी पहले ही हो चुके हैं रिहा:
इस मामले में नामजद अनिल यादव, सरोज यादव उर्फ मनीष यादव एवं अमित यादव को साक्ष्य के अभाव में पूर्व में रिहा किया जा चुका है। सोमवार को फैसला सुनाए जाने के दौरान अभियुक्तों के परिजन और शुभचिंतक बड़ी संख्या में न्यायालय परिसर पहुंचे थे। लेकिन, सोमवार को ही एएसआई हत्याकांड में भी फैसला होना था, जिसे देखते हुए न्यायालय परिसर में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। ऐसे में, सुरक्षा कारणों से परिजनों और समर्थकों को न्यायालय के प्रवेश द्वार से हटाया दिया गया था।
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