JPSC Exam Case Court Order 2026: JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े CID थाना कांड संख्या 16/2026 में अदालत ने अपने पूर्व आदेश में हुई एक टाइपिंग गलती को सुधार दिया है। अभियोजन पक्ष की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा में अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी स्वयं शामिल हुए थे, जबकि उनके पिता सुखदेव तिवारी के परीक्षा में शामिल होने का उल्लेख अनजाने में हुई त्रुटि के कारण दर्ज हो गया था।
अदालत ने रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद पूर्व आदेश में आवश्यक संशोधन करते हुए स्थिति स्पष्ट कर दी। अदालत ने यह भी कहा कि 5 सितंबर 2026 का मूल आदेश अन्य सभी मामलों में यथावत रहेगा।
पूर्व आदेश के पैरा-9 में दर्ज हो गया था गलत नाम
मामले में अदालत के 5 सितंबर 2026 के आदेश के पैरा-9(i) में एक टाइपिंग त्रुटि सामने आई थी। आदेश में अभय कुमार तिवारी के पिता सुखदेव तिवारी का नाम इस तरह दर्ज हो गया था, जिससे यह आभास हो रहा था कि परीक्षा में पिता शामिल हुए थे।
अभियोजन पक्ष ने इस त्रुटि की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित करते हुए आदेश में सुधार करने का अनुरोध किया। इसके बाद अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की।
अदालत ने माना, अनजाने में हुई थी टाइपिंग की गलती
रिकॉर्ड की जांच के बाद अदालत ने माना कि पूर्व आदेश में दर्ज जानकारी एक अनजाने में हुई टाइपिंग की गलती थी। इसके बाद अदालत ने संशोधित आदेश जारी कर संबंधित तथ्य को स्पष्ट किया।
संशोधित आदेश के अनुसार, TDPL से जुड़े मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, जिनके पिता का नाम सुखदेव तिवारी है, स्वयं JPSC के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं में शामिल हुए थे।
इस स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया कि पिता सुखदेव तिवारी परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे, बल्कि उनका नाम केवल अभय कुमार तिवारी की पहचान के संदर्भ में दर्ज किया गया था।
FRO और ACF प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने का उल्लेख
संशोधित आदेश में परीक्षा से संबंधित विवरण भी दर्ज किया गया है। इसके अनुसार मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी ने TDPL द्वारा आयोजित FRO (PT) Examination 2024 में रोल नंबर 24400147 के साथ परीक्षा दी थी।
इसके अलावा, उन्होंने ACF (PT) Examination 2024 में रोल नंबर 24300086 के साथ शामिल होने का उल्लेख भी आदेश में किया गया है।
अदालत ने अपने रिकॉर्ड और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संशोधन करते हुए परीक्षा में शामिल व्यक्ति की पहचान को स्पष्ट किया।
अदालत ने हितों के टकराव को बताया गंभीर मुद्दा
अदालत ने मामले में सामने आई परिस्थितियों को गंभीर हितों के टकराव का विषय बताया। अदालत की टिप्पणी के अनुसार ऐसी स्थिति सार्वजनिक परीक्षाओं में निष्पक्षता और ईमानदारी से जुड़े सिद्धांतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
अदालत ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाओं की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। मामले से संबंधित कथित परिस्थितियों को इसी दृष्टिकोण से देखा गया।
हालांकि, मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अन्य तथ्यों पर संबंधित जांच एवं न्यायिक कार्रवाई के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।
5 सितंबर का मूल आदेश अन्यथा रहेगा यथावत
अदालत ने अपने सुधारात्मक आदेश में स्पष्ट किया कि 5 सितंबर 2026 का मूल आदेश अन्य सभी पहलुओं में यथावत रहेगा।
नया सुधारात्मक आदेश मूल आदेश के साथ पढ़ा जाएगा और उसे उसी आदेश का अभिन्न हिस्सा माना जाएगा। अदालत द्वारा किया गया यह संशोधन केवल उस टाइपिंग त्रुटि को ठीक करने के लिए है, जिसमें परीक्षा में शामिल व्यक्ति के नाम और उसके पिता के नाम को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई थी।
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े CID थाना कांड संख्या 16/2026 की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर अब नजर बनी रहेगी।
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