Opinion: किसी भी राज्य की वास्तविक संपदा उसकी युवा पीढ़ी की रचनात्मक ऊर्जा और संकल्प शक्ति होती है, इसलिए सरकार का पहला दायित्व यही होना चाहिए कि युवाओं की अपार ऊर्जा को दिशाहीनता और उपेक्षा के भंवर से निकालकर सृजन, सुरक्षा और स्वावलंबन के मार्ग पर अग्रसर किया जाए. शासन की नैतिक और प्रशासनिक कसौटी का आकलन भी इसी आधार पर किया जाना चाहिए कि वह अपनी युवा-शक्ति को किस दिशा में मोड़ती है. योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में युवाओं के क्षमतावर्धन, कौशल-विकास और उनके लिए अवसर सृजित करने की दिशा में जो निरंतर सक्रियता बरती, उसके पीछे यही मूल उद्देश्य है कि युवाओं को लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य का अग्रदूत बनने की दिशा में उन्मुख किया जाए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यही सोच उत्तर प्रदेश में युवाओं का सुनहरा भविष्य लिख रही है.
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