उधर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान को यज्ञ- मंत्रादि से 'पवित्र' किया गया क्योंकि खड़गे जी दलित जो ठहरे और उत्तराखंड है देवभूमि! उसे एक दलित और वह भी कांग्रेसी अपवित्र करे, यह संघ परिवार सहन नहीं कर सकता! कांग्रेस ने इस पवित्रीकरण की शिकायत की तो एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई मगर एक हिंदूवादी की ओर से राहुल गांधी के विरुद्ध हो गई क्योंकि उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में इस 'पवित्रीकरण' का विरोध किया था। गुरुवार को सुना गया कि उत्तराखंड की पुलिस दिल्ली आ रही है- राहुल गांधी को गिरफ्तार करने मगर अंत में यह मामला भी टांय-टांय फिस्स हो गया। पुलिस वहीं की वहीं फ्रिज हो गई!
मोदी के मंत्री जे पी नड्डा ने कॉक्रोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान उनके नेताओं को आश्वासन दिया था कि उन सभी आंदोलनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस की जाएगी, जिन पर आपराधिक मामले नहीं हैं। पुरानी अकड़ चूंकि अभी बाकी है, गई नहीं है तो चालीस दिन बीत जाने पर भी सरकार ने कुछ नहीं किया। सोचा कि इन्हें जो करना हो, करके देख लें।हम तो पहले भी अपने वायदों से मुकरते आए हैं, अब भी मुकरेंगे। तब कॉक्रोच जनता पार्टी की ओर से पांच सितंबर को फिर से आंदोलन की चेतावनी दी गई, तो इनकी नाड़ी खिसक गई।एकदम से रास्ते पर आ गए। सारी अकड़ धूल में मिल गई। सरकार तुरंत सुप्रीम कोर्ट गई एफआईआर वापस करवाने। इस तरह यह मामला भी टांय-टांय फिस्स हुआ!
रैपिड एक्शन फोर्स की पैलेट गन से बुरी तरह घायल साहिल लोचव की एफआईआर एक महीने तक दर्ज नहीं की गई। कोई सुनने को तैयार नहीं था। मंत्रियों का तो कहना था कि पैलेट गन चलने की बात ही झूठी है। राहुल गांधी इकतीसवें दिन एफआईआर करवाने पार्लियामेंट थाने पहुंचे और धरना देकर बैठ गए कि जब तक पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं होगी, हम यहीं रहेंगे। तो फिर से इनकी नाड़ी खिसकी। इन्हें अंदाज नहीं था कि राहुल गांधी इस मामले में इस तरह कूद पड़ेंगे। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने खूब सिर खपाया कि राहुल गांधी से हार मानें या न मानें। सात घंटे बाद एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। यहां भी टांय-टांय फिस्स हो गई।
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