लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी भी है। किसी भी चुनाव में प्रत्येक मत महत्वपूर्ण होता है। यही कारण है कि कहा जाता है—'हर मत मायने रखता है।'
अक्सर कुछ लोग यह सोचकर मतदान से दूर रहते हैं कि उनके एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा? लेकिन इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं, जब बेहद कम अंतर ने चुनाव का परिणाम बदल दिया। कहीं एक मत ने जीत-हार का फैसला किया, तो कहीं सरकार के भविष्य पर असर पड़ा।
मतदान के महत्व को समझने के लिए इतिहास के कुछ उदाहरण उल्लेखनीय हैं—
1. 1800 में अमेरिका में थॉमस जेफरसन और आरोन बर के बीच बराबरी के बाद प्रतिनिधि सभा ने जेफरसन को राष्ट्रपति चुना।
2. 1824 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जॉन क्विंसी एडम्स को प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति चुना, जबकि एंड्रयू जैक्सन को लोकप्रिय और इलेक्टोरल वोट में बढ़त हासिल थी।
3. 1868 में अमेरिकी राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन महाभियोग में दोषसिद्धि से केवल एक वोट के अंतर से बच गए।
4. 1876 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रदरफोर्ड बी. हेस और सैमुअल टिल्डेन के बीच बेहद करीबी मुकाबला हुआ और चुनाव का परिणाम विवादित रहा।
5. 1999 में भारत में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर एक वोट के अंतर से गिर गई। यह भारतीय संसदीय इतिहास में एक वोट की अहमियत का चर्चित उदाहरण है।
6. 2004 में कर्नाटक की विधानसभा सीट पर ए.आर. कृष्णमूर्ति एक वोट से चुनाव हार गए थे।
7. 2008 में राजस्थान की नाथद्वारा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सी.पी. जोशी एक वोट से चुनाव हार गए। भाजपा के कल्याण सिंह चौहान को 62,216 और सी.पी. जोशी को 62,215 वोट मिले थे।
इन उदाहरणों का उद्देश्य केवल इतिहास बताना नहीं, बल्कि यह समझाना है कि लोकतंत्र में मतदाता का प्रत्येक वोट कितना महत्वपूर्ण है।
नगर निकाय का चुनाव हो, विधानसभा या लोकसभा का चुनाव हो अथवा किसी संस्था के पदाधिकारियों का निर्वाचन—मतदान के माध्यम से जनता अपनी पसंद और विश्वास व्यक्त करती है। मतदान नागरिकों को अपनी आवाज रखने का अवसर देता है और शासन-व्यवस्था को जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसलिए मतदान करते समय किसी जाति, वर्ग, व्यक्तिगत दबाव या प्रलोभन के बजाय प्रत्याशी की योग्यता, ईमानदारी, कार्यक्षमता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देना चाहिए।
आपका एक वोट शायद आपको छोटा लगे, लेकिन लोकतंत्र में वही एक वोट कभी-कभी बड़े बदलाव का कारण बन सकता है। इसलिए मतदान के दिन घर से निकलें, अपने मताधिकार का प्रयोग करें और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।
अंत में दो पंक्तियां—
योग्य व कर्मठ प्रत्याशी को ही,
अपना अमूल्य मत देना।
लोभी या लालची प्रत्याशी को,
भूलकर भी चुन मत लेना।।
— गोवर्द्धन दास बिन्नाणी 'राजा बाबू'
जय नारायण व्यास कॉलोनी, बीकानेर
(0)Comments