जब मैं अपने पति के साथ रात के खाने के बाद टहलने निकलती हूं, तो कभी-कभी वह मुझसे थोड़ा और चलने को कहते हैं, ताकि अपनी एपल वॉच की 'रिंग्स' पूरी कर सकें। ये तीन घेरे (रिंग्स) बताते हैं कि उन्होंने दिनभर में कितनी शारीरिक गतिविधि की है। मैंने इसी विचार को अपनी दोस्ती पर भी आजमाना शुरू किया। मुझे एहसास हुआ कि अगर हफ्ते में कम से कम एक दोस्त से मेरी बात नहीं होती, तो मुझे कुछ अधूरा-सा महसूस होने लगता है। इसलिए, अब हर हफ्ते मैं खुद से पूछती हूं कि क्या मैंने अपनी 'सोशल रिंग्स' पूरी कीं?
मैंने यूसीएलए सेंटर फॉर फ्रेंडशिप रिसर्च की निदेशक जैमी अरोणा क्रेम्स से पूछा कि दोस्ती को फिटनेस की तरह ट्रैक करना अजीब है क्या? उन्होंने कहा, 'बिल्कुल नहीं।' हम स्वस्थ रहने के लिए सब्जियां खाने, पानी पीने और अच्छी नींद की तो बात करते हैं, लेकिन दोस्तों के साथ जुड़ाव को अक्सर भूल जाते हैं। शोध बताते हैं कि अच्छी दोस्ती दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है, तनाव कम कर सकती है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकती है। लेकिन, व्यस्त जिंदगी में दोस्तों के लिए समय निकालना भी आसान नहीं।
कैनसस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी हॉल कहते हैं कि अगर किसी दोस्त से दूरी बढ़ रही हो, तो एक-दूसरे की दिनचर्या समझें और ऐसा समय तलाशें, जब दोनों थोड़ी देर खाली हों। उनके मुताबिक, किसी के शेड्यूल के बारे में जानना उससे दूर रहते हुए भी करीब महसूस कराता है। डार्टमाउथ की समाजशास्त्र प्रोफेसर जेनिस एम मैककेबे के लिए कुत्ते को साथ टहलाना भी दोस्तों से जुड़े रहने का आसान तरीका है। वहीं, क्रेम्स कहती हैं कि छोटी-सी बातचीत भी काफी होती है। आवाज का अपनापन, हंसी-मजाक और साथ हंसना जुड़ाव को मजबूत करता है। हॉल का सुझाव है कि घर का काम करते हुए दोस्तों के साथ बात की जा सकती है। शुरुआत में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, पर धीरे-धीरे यह रोजमर्रा की जिंदगी में साथ बने रहने का तरीका बन जाता है। डॉ. क्रेम्स ने कहा कि किसी का हाल पूछने में ज्यादा समय नहीं लगता, लेकिन इससे उसे सहारा मिलता है और अकेलापन कम महसूस होता है।
घर का काम करते हुए दोस्तों से बात करने वाला तरीका मैंने भी अपनाया। यकीन मानिए, अक्सर बात करते-करते मुझे पता भी नहीं चलता कि मैंने कब काम खत्म कर लिया। दोनों काम एकसाथ हो जाते हैं।
(0)Comments